लखनऊ । प्रांतीय चिकित्सा सेवा संवर्ग (पीएमएस) के डाक्टरों ने मांग की है कि केजीएमयू, लोहिया जैसे चिकित्सा संस्थानों में फोरेंसिक मेडिसिन विभाग के डाक्टरों के जरिए पोस्टमार्टम ड्यूटी करवाया जाए। इसके लिए राज्यपाल के नाम संबोधित मांग पत्र भेजा गया है। पीएमएस संवर्ग के इसके लिए कई तर्क दिये गये हैं। यह भी चिंता जतायी है कि पोस्टमार्टम ड¬ूटी समेत कई दिक्कतों के कारण नए डॉक्टर इस संवर्ग में नौकरी करने के लिए नहीं आना चाहते हैं।
पीएमएस संवर्ग के तहत बलरामपुर अस्पताल, सिविल, लोकबंधु, बीकेटी में आरएसएम, बीआरडी महानगर, ठाकुरगंज संयुक्त सहित अन्य सरकारी अस्पतालों में डाक्टर विभिन्न विभागों में ड्यूटी करते हैं। इन डाक्टरों का कहना है कि शासनादेश चिकित्सा अनुभाग-2 दिनांक 28 दिसंबर, 2015 के अनुसार पोस्टमार्टम की प्रक्रिया राजकीय निजी मेडिकल कॉलेज के फॉरेंसिक मेडिसिन विभाग के डॉक्टरों से कराया जाना चाहिए। इस आदेश में यह था कि निजी मेडिकल कॉलेज के डॉक्टर सिर्फ लवारिस शव का पोस्टमार्टम कर सकते एवं राजकीय मेडिकल कॉलेजों के डाक्टरों को लवारिस एवं संवेदनशील शवों के पोटसमार्टम के लिए सुनिश्चित किया गया, जिसकी संपूर्ण जिम्मेदारी राजकीय अस्पतालों के नियमित डाक्टरों की थी।
उनका तर्क है कि केजीएमयू और लोहिया संस्थान में नियमित डॉक्टर, सीनियर रेजीडेंट एवं फोरेंसिक मेडिसिन विभाग के जूनियर रेजिडेंट मौजूद हैं, जो इस विधा के विशेषज्ञ हैं। यदि इनके पर्वेक्षण में पोस्टमार्टम की प्रक्रिया की जाती है तो न्यायायिक कार्यों एवं मृतकों और उनके परिवारीजनों को मेडिकोलीगल प्रक्रिया में किसी तरह की समस्याएं नहीं झेलनी पड़ेगी। जूनियर रेजिडेंट प्रशिक्षार्थी हैं।
वह भविष्य में इस विधा में सही से प्रशिक्षित हो सकेंगे लेकिन केजीएमयू और लोहिया संस्थान के डाक्टर इसकी जिम्मेदारियों से विरत रहते हैं। इसके कारण वहां के रेजिडेंट्स बिना प्रशिक्षण के ही उपाधि प्राप्त कर रहे हैं, जो कि भविष्य के लिए उचित नहीं है। इन रेजिडेंट के काम न करने के कारण पीएमएस संवर्ग के डाक्टरों की ड्यूटी पोस्टमार्टम में लगायी जा रही है।















