प्लाज्मा थेरेपी प्रयोग वाले डाक्टर मरीज की मौत

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लखनऊ। किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय में पहली बार कोरोना संक्रमित मरीज की प्लाज्मा थेरेपी होने के बाद उसकी मौत हो गयी। यह जालौन के उरई निवासी मरीज डा. सुनील अग्रवाल का शनिवार की प्लाज्मा थेरेपी के बाद हालत में सुधार भी हो गया था। उसकी कोरोना संक्रमण की दो रिपोर्ट निगेटिव आयी थी। डाक्टरों के अनुसार प्लाज्मा चढ़ाये जाने वाले मरीज चूंकि पुराने डायबिटीज के मरीज थे। ठीक होने के साथ ही मरीज डाक्टर को यूटीआई( पेशाब की नली में संक्रमण) होने के बाद किडनी भी प्रभावित होने लगी थी, डायलिसिस कराने के बाद भी उनकी हालत में सुधार नहीं हुआ आैर मरीज डाक्टर की मौत हो गयी। इनकी पत्नी भी कोरोना संक्रमित थी, जिसकी लगातार कोरोना संक्रमण रिपोर्ट निगेटिव आने के बाद आज ही डिस्चार्ज कर दिया गया है।

बताते चले कि 26 अप्रैल को प्रदेश में पहली बार केजीएमयू में किसी कोरोना वायरस से संक्रमित मरीज की प्लाज्मा पद्धति से इलाज किया गया था। यह कोरोना संक्रमित मरीज उरई के डाक्टर थे, इनकी तबियत बिगड़ने पर उनको प्लाज्मा देने वाली महिला भी कनाडा की एक डाक्टर ही है, यह डाक्टर भी कोरोना वायरस से संक्रमित हुई थी आैर केजीएमयू में ही भर्ती होने के बाद ठीक हो गयी थी।

केजीएमयू के प्रवक्ता डा. सुधीर ने बताया कि 14 दिन बाद मरीज की हालत स्थिर बनी थी। वेंटिलेटर पर भर्ती होने के बाद प्लाज्मा पद्धति देने के बाद उनके फेफड़े की स्थिति में काफी सुधार आया था। वेंटिलेटर के उपकरण का प्रयोग कम होने लगा था। डाक्टर मरीज के बाद में उनके पेशाब की नली में संक्रमण हो गया था। इसका असर तेजी से किडनी पर पड़ रहा था। डाक्टरों ने डायलिसिस भी की थी, लेकिन हालत में सुधार न होने के बाद मरीज की अचानक मौत हो गयी।
उन्होंने बताया कि शनिवार को मृतक की दोनों कोरोना रिपोर्ट भी निगेटिव आयी थी, लेकिन शाम को तबियत बिगड़ी आैर डाक्टरों के प्रयासों के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका। डा. सुधीर ने बताया कि उनके साथ उनकी पत्नी भी कोरोना पॉजिटिव पायी गयी थी, उनकी रिपोर्ट निगेटिव पाये जाने के बाद शनिवार को उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। उन्होंने बताया कि डाक्टर भी केजीएमयू के जार्जियन थे।

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