लखनऊ। संजय गांधी पीजीआई में न्यूरो ओटोलॉजिस्ट पाठ¬क्रम शुरु होने जा रहा है। यह जानकारी न्यूरो सर्जरी विभाग में वल्र्ड हेयरिंग डे के अवसर पर बुधवार को निदेशक प्रो. आर के धीमान दे दी।
निदेशक प्रो. धीमान वल्र्ड हेयरिंग डे पर आयोजित कार्यक्रम में बुधवार को जन जागरुकता कार्यक्रम में सम्बोधित कर रहे थे। कार्यक्रम में ईएनटी के विभागाध्यक्ष प्रो अमित केशरी ने कहा कि अभी न्यूरो ओटोलांँजी संस्थान के न्यूरो सर्जरी विभाग के तहत चल रहा है। न्यूरोओटोलाँजिस्ट वो होते हैं जो कान और ब्रोन दोनों को देखते हैं। दरअसल कान की नसें दिमाग से जुड़ी होती है। उससे जुड़ी बीमारियों को न्यूरो ओटोलांँजी के तहत देखा और कम्प्लीट इलाज किया जाता है। जल्द ही इसको लेकर एकेडमिक कोर्स शुरू करने की तैयारी चल रही हैं। जहाँ एमसीएच के तहत तीन वर्षीय कोर्स शुरू किया जाएगा। इस तरह का कोर्स पूरे भारत में कही नहीं है। कुछ जगहों पर केवल सटिर्फिकेट कोर्स चल रहा हैं। ऐसे में पीजीआई देश का पहला संस्थान बनेगा। जहां पर तीन साल कोर्स होगा। इस तरह का कोर्स अधिकतर अमेरिका व यूरोप आदि देशों में होते हैं।
न्यूरो सर्जरी विभाग प्रमुख प्रो संजय बिहारी ने कहा कि सुनने की क्षमता कम होना या फिर कान का कोई ट्यूमर जो दिमाग के बहुत करीब हो, अब ऐसी जटिल बीमारियों को और भी सटीक इलाज हो सकेगा, क्योंकि जल्द ही संजय गांधी पी जी आई में न्यूरो ओटोलांँजी कोर्स शुरू करने की तैयारी चल रही हैं। यह कोर्स तीन साल का होगा, जो पूरे देश के किसी संस्थान में पहली बार शुरू किया जाएगा। उन्होंने कहा कि न्यूरोओटोलाँजी इकाई द्वारा किये जा रहे कार्यों का लेखा-जोखा प्रस्तुत किया।
उन्होंने कहा कि बच्चों में सुनने की अक्षमता को पहचानने में अभिभावकों व समाज की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण हैं। इसके जल्दी निदान और उपचार से बच्चों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाये जा सकते हैं। इस अवसर पर विशेष रूप से रोगियों के लिए “अभिभावक सूचना पुस्तिका” का विमोचन किया गया। जिसमें कॉक्लियर इम्पलांट की आवश्यकता व प्रक्रिया को समझाया गया।















