लखनऊ । संजय गांधी पीजीआई में तीमारदारों को पेट भरने के लिए अब अधिक खर्च करने होंगे। यहां कैटीन के रेट में 15-20 प्रतिशत तक बढ़ोत्तरी हो सकती है जिससे यहां गरीब तीमारदारों के लिए पेट भरना काफी मुश्किल होगा। मालूम हो कि राजधानी के कई सरकारी अस्पताल जैसे लोहिया, सिविल बलरामपुर में अब मरीजों के साथ तीमारदारों को भी मुफ्त भोजन देने की व्यवस्था की जा रही है। वहीं देश के बड़े संस्थानों में शुमार पीजीआई में तीमारदारों की भोजन दरें महंगी होने जा रही है।
यहां कैंसर, लीवर, किडनी व कई अन्य बीमारियों के गभीर मरीज भर्ती होते हैं जिनके इलाज के लिए तीमारदारों को कई महीनों तक यहां रूकना पड़ता है। मरीज को तो संस्थान भोजन उपलब्ध करा देता है लेकिन तीमारदारों के लिए कैटीन ही एक सहारा है। संस्थान के मुख्य गेट की दूरी भी इतनी अधिक है कि तीमारदारों के लिए बाहर जाकर भोजन करना स भव नहीं है। ऐसे में तीमारदार चाय, नाश्ता, खाना आदि के लिए यहां की कैटीन पर ही निर्भर है। अभी तक तीस से चालीस रूपये में तीमारदारों को भरपेट भोजन मिल जाता है। टेंडर के बाद थाली का रेट क्या होगा, फिलहाल यह अभी तय नहीं है लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों का कहना है कि पिछले कई सालों से टेंडर नहीं हुआ है और महंगाई भी बढ़ गयी है तो रेट में 15 से 20 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी हो सकती है।
इस टेंडर का मूल्य करीब 3 करोड़ रूपये बताया जा रहा है, ऐसे में अधिकारी भी इस बात से इंकार नहीं कर रहे कि महंगाई का असर तीमारदारों की भोजन की थाली पर भी दिखेगा। टेंडर प्रक्रिया 11 अप्रैल के बाद पूरी होगी, इसी के बाद यह पता चल सकेगा कि रेट कितना बढ़ा है। बहरहाल तीमारदार की भोजन की थाली में क्या पौष्टिकता व स्वाद आयेगा यह तो वक्त की बतायेगा लेकिन यह तय है कि अब यहां भोजन करने के लिए जेब अधिक ढीली करनी पड़ेगी।
”महंगाई को देखते हुए पुरानी दरों में थोड़ी बहुत बढ़ोत्तरी की जायेगी लेकिन नयी दरें बहुत ज्यादा नहीं होगी। तीमारदारों को कम दरों पर अच्छा भोजन मिले, इसकी पूरी कोशिश है।
-प्रो. राकेश कपूरनिदेशक,संजय गांधी पीजीआई
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