लखनऊ । चार साल से संजय गांधी पीजीआई की लैब व एक्सरे विभाग में संविदा पर कार्यरत टेक्नीशियनों को कार्यमुक्त कर दिया गया जबकि नयी कार्यदायी एजेंसी जीम वेंचर के आते ही नए कर्मचारियों की नियुक्त हो रही है। इसको लेकर धनउगाही के आरोप भी लगाए जा रहे हैं कि पैरामेडिकल स्टाफ जिनको नए ठेके में लिया गया है, उनमें 14 हजार रुपये बतौर गारंटी लिया जा रहा है। इसके अतिरिक्त 1750 रुपये डाक्यूमेंट वेरीफिकेशन के नाम पर लिया जाता है। नयी संविदा नौकरी पाने वाले चुपचाप यह पैसा दे रहे हैं आैर शिकायत करने पर आवेदन निरस्त करने की चेतावनी दी गयी।
कर्मचारी ज्ञापन देने की बात कहते हैं :
हटाये गए कर्मचारियों ने प्रशासन पर वादा खिलाफी का आरोप लगाते हुए प्रदेश के स्वतंत्र प्रभार मंत्री स्वाती सिंह को ज्ञापन देकर न्याय की गुहार लगायी है। इसके अतिरिक्त मुख्यमंत्री व चिकित्सा शिक्षा मंत्री को भी कर्मचारी ज्ञापन देने की बात कहते हैं। काम से हटाए गए शुमभ, नीलेश, रिजवान आैर शैलेष बताते हैं कि चार साल से संस्थान में एक्सरे व लैब टेक्नीशियन के पद पर काम कर रहे संविदा सफाई कर्मचारी, पेसेन्ट हेल्पर के संविदा में रहते हुए काम कर रहे थे। अब संस्थान ने लैब टेक्नीशियनों आैर एक्सरे टेक्नीशियन के लिए नयी संविदा प्रक्रिया लागू किया है, जिसमें हम लोगों को न रखकर नए लोगों को रखा जा रहा है। हमारे चार साल के अनुभव को दरकिनार किया गया।
संस्थान का तर्क हैं कि हम लोगों की योग्यता नहीं है तो उसका मतलब आज तक जो काम किया, वह गलत है। संस्थान प्रशासन के अनुसार उक्त पद के लिए बीएससी या डिप्लोमा की योग्यता होना जरूरी है। सब कुछ नियमानुसार हो रहा है।