नयी तकनीक से दी गयी एनेस्थीसिया से मरीज हो जल्दी होगा ठीक

0
91

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

लखनऊ। पी जी आई में 100 से अधिक मरीजों की सर्जरी में सेगमेंटल स्पाइनल एनेस्थीसिया (SSA) का इस्तेमाल किया गया है। यह तकनीक टारगेटेड होती है यानी की जिस अंग की सर्जरी होनी है, एनेस्थीसिया सिर्फ उसी अंग पर काम करेगा। इससे मरीज का स्वास्थ्य जल्दी अच्छा होगा। साथ ही इसमें खर्च भी कम आता है। यह जानकारी एनेस्थीसिया विभाग के एचओडी डॉ. संजय धिराज ने गुरुवार को दी है।

 

 

 

 

 

 

 

 

 

डॉ. संजय धिराज ने बताया कि पिछले एक सदी में एनेस्थीसिया (बेहोशी की प्रक्रिया) के क्षेत्र में कई गुना प्रगति हुई है, जिसके परिणामस्वरूप सर्जरी के दौरान होने वाली जटिलताओं और मृत्यु दर में लगभग 100 गुना कमी आई है। यह उपलब्धि आधुनिक तकनीकों, सुरक्षित दवाओं और उन्नत मॉनिटरिंग प्रणालियों के कारण संभव हुई है, जिन्हें आज के एनेस्थीसियोलॉजिस्ट अपनाते हैं।

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

डॉ. संजय धिराज का कहना है कि अब एक नई तकनीक सामने आई है, जिसे सेगमेंटल स्पाइनल एनेस्थीसिया (SSA) या थोरासिक स्पाइनल एनेस्थीसिया (TSA) कहा जाता है। इस तकनीक में शरीर के केवल उसी हिस्से को सुन्न किया जाता है, जहां सर्जरी होनी है, जैसे पेट या छाती का कोई विशेष भाग। इससे पूरे शरीर को प्रभावित करने की जरूरत नहीं पड़ती।

 

 

 

 

 

 

 

 

डॉ. चेतना ने बताया कि इस तकनीक के कई महत्वपूर्ण लाभ हैं। इससे अधिकांश मामलों में वेंटिलेटर की आवश्यकता नहीं पड़ती और सर्जरी के दौरान मरीज की हृदय गति और रक्तचाप अधिक स्थिर रहते हैं। यह विशेष रूप से उन मरीजों के लिए लाभकारी है, जिन्हें पहले से हृदय या फेफड़ों की बीमारी है। SSA का उपयोग कई प्रकार की सर्जरी में किया जा सकता है। जिसमे रीढ़, मूत्र रोग, पेट, छाती, बच्चों की सर्जरी, प्लास्टिक सर्जरी और हड्डियों से जुड़ी बीमारी की सर्जरी प्रमुख है। डॉ. रुचि वर्मा ने बताया कि गंभीर मरीजों के लिए यह तकनीक काफी सुरक्षित और कारगर है। इसके अलावा इसमें दवाओं की डोज भी कम होती है। जिसे शरीर को नुकसान नहीं होता, साथ ही खर्च भी कम आता है।

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

डॉ. सुजीत ने बताया कि इस तकनीक के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए एसजीपीजीआईएमएस, लखनऊ के एनेस्थीसिया विभाग और NADS फैकल्टी द्वारा 4 और 5 अप्रैल को दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम और कार्यशाला का आयोजन किया जा रहा है। इसमें देशभर से सरकारी और निजी अस्पतालों के डॉक्टर हिस्सा ले रहे हैं। विशेषज्ञ इस दौरान व्याख्यान और प्रायोगिक प्रशिक्षण देंगे।

 

 

 

 

Previous articleहनुमान जन्मोत्सव पर विहिप – बजरंग दल ने निकाली भगवा बाइक यात्रा
Next articlePGI: 200 सफल पीडियाट्रिक रोबोटिक सर्जरी का अनुभव होगा साझा

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here