समय पर उपकरण ठीक नही होने से बेहाल मरीज

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लखनऊ। सरकारी अस्पतालों में उपकरणों के मरम्मत करने वाली निजी कंपनी सायरेक्स निर्धारित समय में ठीक नहीं कर पा रही है। मशीनों को ठीक नहीं कर पा रही है। ऐसे में मरीजों का इलाज के लिए परेशान हो रहा है, लेकिन अधिकारी इस पर कोई ठोस कार्रवाई नही कर रहे है। बताते चले कि बलरामपुर अस्पताल में छह महीने से अल्ट्रासाउंड मशीन खराब पड़ी है, शिकायत के बाद भी वह ठीक नहीं हो पा रही है। अस्पताल निदेशक का कहना है कि निजी कंपनी मशीन को ठीक नहीं सकी है। इस कारण सिर्फ दो मशीनों के सहारे ही मरीजों का जांच का कार्य चल रहा है। यहां पर अस्पताल की ओपीडी में प्रतिदिन करीब छह हजार मरीज आते है। बीमारियों व अन्य दिक्कतों के अनुसार लगभग दो तीन सौ मरीजों को अल्ट्रासाउंड जांच लिख दी जाती हैं।

उपकरण सही न होने पर लगभग सौ मरीजों की ही जांच हो पा रही है। इसमें गंभीर मरीज भी शामिल होते है। अन्य मरीजों को वेटिंग में तारीख दी जाती है। अस्पताल के रेडियोलॉजी विभाग में करीब तीन मशीनें लगी हैं। इसमें दो पर ही मरीजों की जांच हो पा रही है। एक मशीन पिछले छह माह से खराब है। अस्पताल प्रशासन ने उपकरणों के मरम्मत करने वाली कंपनी सायरेक्स से मशीन सुधरवाने के लिए कई बार शिकायत दर्ज करायी, लेकिन तमाम दावा के बाद भी कंपनी मशीन को ठीक नहीं कर सकी। अस्पताल प्रवक्ता एसएम त्रिपाठी का कहना है कि प्रतिदिन लगभग 300 मरीज अल्ट्रासाउंड के लिए आते हैं।

मशीन खराब होने की वजह से सभी मरीजों का अल्ट्रासाउंड नहीं हो पा रहा है। मरीज को वेंटिग दी जा रही है। अस्पताल निदेशक डॉ. राजीव लोचन ने बताया कि दो मशीन से ही जांच का काम हो रहा है। इसी कम्पनी ने सिविल अस्पताल की ओटी के ऑक्सीजन पाइप लाइन में लीकेज नहीं कर पायी थी। अस्पताल कर्मचारियों ने निजी कंपनी के कॉल करके शिकायत दर्ज कराई। शिकायत दर्ज कराने के तीन दिन बाद लीकेज को कंपनी ठीक कर पायी। ऐसे में ऑक्सीजन गैस बेकार जाती रही। वहीं अस्पताल में लगी डिजिटल एक्सरे मशीन भी चार दिन से खराब होने बाद भी उसे सुधारा नहीं जा सका है।

बताते चले कि प्रदेश में उपकरणों को ठीक कराने का जिम्मा सायरेक्स कंपनी को मिला है, जो उपकरणों को ठीक करने में काफी देर कर रही है। इसके बाद भी कंपनी पर जुर्माना लगाए जाने का दावा तो किया जाता है, लेकिन जिम्मेदारी अधिकारी ही बचाने में जुटे रहते है। अस्पताल में पूर्व में करीब दो माह तक दो डायलिसिस मशीनें खराब पड़ी थी, जिसे कंपनी ठीक करने में कई वक्त लगा दिया था।

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