सोते वक्त अगर खाना, पानी नाक और मुंह से बाहर निकले, तो करें नजर अंदाज

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लखनऊ। पीजीआई के गेस्ट्रोइंट्रोलॉजी विभाग द्वारा आयोजित कांफ्रेंस में शनिवार को पेट रोग विशेषज्ञ व पीजीआई के पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो. जी चौधरी बताया कि इंसान का वजन उसकी लम्बाई के एवज में होना चाहिये। इंसान की सेमी. में जितनी लम्बाई होती है। उसमें से 100 घटाने पर जितना बचता है। वही वजन सेहत के लिये अच्छा माना जाता है। यदि इससे अधिक वजन है तो मोटापा, फैटी लिवर के साथ ही डायबिटीज और ब्लड प्रेशर समेत तमाम दिक्कतें होनी शुरू हो जाती हैं। वजन कम करने के लिए नियमित कसरत जरूरी है।

150 देश के बीच रैकिंग में भारत 144 वें स्थान पर है। गेस्ट्रोइंट्रोलॉजी विभाग के डॉ. समीर मोहिन्द्रा ने कहा कि अगर खाना खाने में सामान्य लोगों की तुलना में समय अधिक लगता है। खान और पानी निगलने में दिक्क त है। सोते वक्त अगर पानी और खाना नाक और मुंह से बाहर आ जाता है, तो नजर अंदाज न करें। डॉक्टर की परामर्श लें। यह आहार नली के कैंसर के लक्षण हैं। खाने की नली के कैंसर का आपरेशन अब बीना चीरा संभव है। यह इण्डोस्कोपिक द्वारा संभव हुआ है। यह विधि पेरोरल इंण्डोस्कापिक मायोटमी (पोयम) इण्डोस्कोपिक दूरबीन द्वारा संभव हुआ है। इससे मरीज को अस्पताल में कम समय तक रहने के साथ ही इलाज भी सस्ता होता है।

पीजीआई के पेट रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रवीर राय बताते हैं कि इंडोस्कोपिक अल्ट्रासाउंड की वजह से पेट के मरीजों का इलाज आसान हो गया है। इस तकनीक से इंडोस्कोप के निचले हिस्से में अल्ट्रा साउंड का प्रोब लगाकर पेट में जाते हैं। पेट के अंदरूनी अंगो की बनावट के साथ ही उनकी दिक्कत का सही पता चलता है। अमूमन सीने में गिल्टी आदि की दिक्कत होने पर डॉक्टर मरीज को टीबी की दवा देते थे, लेकिन इस तकनीक के जरिये 300 मरीजों में अल्ट्रासाउंड कर देखा गया कि टीबी नहीं है बल्कि बल्कि दूसरी बीमारी है।

इस तकनीकि से पित्ताशय कैंसर, प्रैक्रियाज कैंसर, क्रानिक पैक्रिएटाइटिस, पित्ताशय में पथरी का पता लगाना बहुत आसान हो गया है। जिसके आधार पर मरीज को सही इलाज देकर ठीक करने की दर पहले की तुलना में बहुत अधिक हो गई है। पीजीआई के गेस्ट्रोसर्जन डॉ. आनंद प्रकाश बताते हैं कि गॉल ब्लेडर, पित्त की नली पांक्रियाज में कैंसर वाले मरीज में पीलिया की दिक्कत आम होती है। पीलिया ठीक होने के बाद ही आपरेशन संभव है।

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