न स्ट्रेचर ,न इलाज समय नहीं देने का आरोप, मरीज की मौत

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केजीएमयू का इमरजेंसी ट्रामा सेंटर
लखनऊ। किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय प्रशासन के तमाम दावों के बाद भी इमरजेंसी ट्रामा सेंटर में रात की चिकित्सा व्यवस्था पटरी पर नहीं लौट रही है। तीमारदारों की शिकायत रहती है कि रात में मरीजों को इमरजेंसी में देखने के लिए जल्द देखा नहीं जाता है आैर कहां पर मरीज को शिफ्ट होना इसमें देर की जाती है। बीती रात भी कुछ ऐसी ही तीमारदारों को शिकायत बनी रही। आरोप है कि दुर्घटना में घायल होने के बाद पहुंचा मरीज लगभग घंटे भर बिना इलाज के तड़पता रहा। आरोप है कि पहले तो स्ट्रेचर नहीं मिल रहा था और बाद में डॉक्टरों ने इलाज करने में अनदेखी कर दी। लगभग घंटे भर बाद जब डॉक्टर ने मरीज को नब्ज देखी तो सांसे थम चुकी थी।
बताते चले कि केजीएमयू प्रशासन ने इमरजेंसी ट्रामा सेंटर की व्यवस्था को सुधारने करने के लिए दर्जन भर संकाय सदस्यों को तैनाती कर दी है। इस दावे के बाद भी यहां की चिकित्सा व्यवस्था नहीं सुधर रही है। आरोप है कि रात्रिकालीन ड¬ूटी में संकाय सदस्य के नहीं होने के कारण गंभीर मरीजों पर भी ध्यान नही दिया जाता है।
रायबरेली निवासी इंदर सिंह को लेकर एक्सीडेंट में घायल होने पर तीमारदार ट्रामा सेंटर लेकर पहुंचे। तीमारदारों का आरोप है कि यहां पहुंचने पर एम्बुलेंस से उतारने के लिए स्ट्रेचर की तलाश शुरू की गयी। मजूबरी में मरीज को जमीन पर लेटा दिया गया। स्ट्रेचर की जानकारी के दौरान वार्ड बॉय ने बताया कि पहले टोकन लेना होगा। कोशिश के लगभग आधे घंटे बाद टोकन मिला और फिर स्ट्रेचर मिल सका। इसके बाद बताये गये स्टेशन पर लेकर मरीज को अंदर पहुंचे तो डाक्टर नही थे। कई बार पूछने पर वहां मौजूद नर्सिंग कर्मियों ने बताया कि अभी दूसरी शिफ्ट के डाक्टर आ रहे तब मरीज को देखा जाएगा। तीमारदारों का आरोप है कि इस पूरी प्रक्रिया में करीब एक घंटे से ज्यादा समय गुजर गया। काफी फरियाद के बाद जब तक डॉक्टर देखने पहुंचे तब तक मरीज की मौत हो चुकी थी। मृतक के तीमारदारों ने पूरे मामले की शिकायत मुख्यमंत्री सहित शासन के अधिकारियों से की है।
इस बारे में मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डा. संदीप का कहना है कि इमरजेंसी ट्रामा सेंटर में स्ट्रेचर की कमी नहीं है। डाक्टरों की एक टीम के आने के बाद दूसरी टीम जाती है। ऐसे में तीमारदारों का यह आरोप गलत प्रतीत होता हैं। हो सकता हो गंभीर रूप से घायल होने की वजह से मरीज की रास्ते में ही मौत हो चुकी हो। फिलहाल शिकायत मिलने पर जांच करायी जाएगी।

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