पटाखे जलाने में लापरवाही से इतने लोग पहुंचे इमरजेंसी

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पटाखों से 1000 से ज्यादा जले, 227 भर्ती

लखनऊ। दीपावली पर पटाखे को जलाने में जरा सी लापरवाही से लोग घायल होकर उपचार के लिए Kgmu , लोहिया संस्थान व राजधानी के प्रमुख सरकारी अस्पताल पहुंचे, इनमें पटाखों से 1000 से ज्यादा जले, 227 भर्ती कराये गये। लापरवाही के कारण कोई पटाखे जलाते समय जख्मी हुआ तो कोई दीपक या फिर झालर से जोरदार झटका लगा।

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केजीएमू में ट्रामा सेन्टर पहुंचे परिजनों का कहना था कि दिपावली पर आयान लहसुन बम दगा रहे थे। कुछ पटाखे हाथ में पकड़ रखे थे। एक पटाखा गलती से दबा और हाथ में ही फट गया। इससे पंजा बुरी तरह से जख्मी हो गया। परिजनों ने तुरंत आयान को ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया। केजीएमयू के ट्रॉमा सेंटर में डॉक्टरों ने प्राथमिक इलाज के बाद घर भेज दिया। संतराम पाठक बम खरीदकर घर जा रहे थे। तभी उनका पैर नाले के किनारे फिसल गया और वह गिर गए। झोले में रखे पटाखों में विस्फोट हो गया, जिससे हाथ बुरी तरह झुलस गया। दो जगह से हाथ फ्रैक्चर हो गया। मांस भी निकल गया। परिवारीजन खून से लथपथ हाल में मरीज को लेकर केजीएमयू के ट्रॉमा सेंटर पहुंचे। प्राथमिक इलाज के बाद डॉक्टरों ने घायल को प्लास्टिक सर्जरी विभाग में भर्ती कराया। इस तरह से लापरवाही करने पर इस बार लखनऊ में करीब 227 लोगों की दिवाली अस्पतालों में गुजरी।

केजीएमयू में सबसे ज्यादा गंभीर अवस्था में मरीज भर्ती किए गए। 37 मरीज ट्रॉमा सेंटर में लाए गए। इनमें 15 मरीजों को प्लास्टिक सर्जरी विभाग भेजा गया। पटाखे हाथ व जेब में फटने से हाथ व पैर की कई जगह से हड्डियों को नुकसान हुआ। गहरे जख्म हो गए। कई मरीजों की अंगुली उड़ गई। आठ मरीजों का चेहरा पटाखे व आग से घायल हुए। केजीएमयू के प्रवक्ता डा. केके सिंह ने बताया कि पटाखे व आग की घटनाओं में 37 जख्मी लोगों को केजीएमयू लाया गया। इसमें 19 मरीजों को ट्रॉमा इमरजेंसी से इलाज के बाद घर भेज दिया गया। बाकी को भर्ती कर इलाज मुहैया कराया जा रहा है। लोहिया संस्थान में 53 मरीजों इमरजेंसी में आए जिसमें नौ मरीजों का रेफर किया गया

दीपावली के दिन बलरामपुर अस्पताल, सिविल अस्पताल आैर लोकबंधु समेत अन्य अस्पतालों में हाफडे ओपीडी थी। ओपीडी में सामान्य दिनों की अपेक्षा मरीजों की संख्या काफी कम थी आैर वार्डों में ज्यादातर मरीज दीपावली मानने के लिए छुट्टी लेकर जा चुके थे, इसलिए खाली बिस्तरों की संख्या काफी ज्यादा थी। इमरजेंसी में इक्का-दुक्का मरीज ही पहंुच रहे थे लेकिन शाम पांच बजे के बाद मरीजों की भीड़ लगने शुरू हुई तो देर रात तक मरीजों का आना जारी रहा। पटाखों से जलने और हादसों में घायल हुए बड़ी संख्या में लोग इलाज के लिए पहुंचे।

सरकारी अस्पतालों में लगभग 1000 मरीजों ने इलाज कराया, जिनमें बर्न पेशेंट और एक्सीडेंटल केस शामिल थे। पटाखों से जलकर 10 साल की बच्ची गंभीर रूप से झुलस गयी। सिविल अस्पताल में भर्ती कर उसका इलाज बर्न वार्ड में शुरू किया गया। कुछ गंभीर मरीजों को हायर सेंटर भी रेफर किया गया। सिविल अस्पताल में दीपावली के दौरान बड़ी संख्या में जले और घायल मरीज पहुंचे। 24 घंटे में कुल 268 मरीज आए, जिनमें 83 बर्न केस और 35 एक्सीडेंटल मरीज थे।

इसके दूसरी तरफ बलरामपुर अस्पताल में 24 घंटे के भीतर 482 मरीज पहुंचे, जिनमें से 67 को भर्ती किया गया, इनमें एक मरीज गंभीर रूप से झुलसा हुआ था। अस्पताल प्रशासन ने दिवाली को देखते हुए पहले से ही बर्न, प्लास्टिक सर्जरी और नेत्र रोग विभागों के डाक्टरों को तैनात कर दिया था।

अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डा. हिमांशु चतुर्वेदी ने बताया कि कुल 67 लोगों को पटाखे व आग में झुलसने के बाद इमरजेंसी में लाया गया, इनमें 49 लोग सड़क हादसे व पटाखे के शिकार हुए थे। 33 लोगों को टांके लगाए गए। छह मरीजों के आंखों में चोटें आर्इं। दीपक से लगी आग में भी एक व्यक्ति झुलस गया। उसे इमरजेंसी में भर्ती कर इलाज मुहैया कराया जा रहा है।

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