kgmu के इतिहास में सेवा निवृत्त से तीन दिन पहले इस कारण डा.आमोद बर्खास्त

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लखनऊ। किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय में हुई कार्यपरिषद की बैठक में फार्माकोलॉजी विभाग के निलंबित विभागाध्यक्ष डॉ. आमोद कुमार सचान को बर्खास्त कर दिया गया है। यह कार्रवाई प्राइवेट प्रैक्टिस, निजी संस्था से फायदा लेने के अलावा विभिन्न संस्था के महत्वपूर्ण पदों पर काबिज होने के आरोपों में की गयी है। सेवानिवृत्ति से ठीक तीन दिन पहले डॉ. सचान को बर्खास्त किया गया है।

अगर देखा जाए तो केजीएमयू के इतिहास में पहली बार किसी डॉक्टर को प्राइवेट प्रैक्टिस के आरोप में बर्खास्त किया गया है। कुलपति डॉ. सोनिया नित्यानंद के कार्यकाल में कु छ डॉक्टरों पर प्राइवेट प्रैक्टिस के आरोप लगे है। लगभग अठरह वर्ष से जांच ही चल रही है।
कुलपति कार्यालय के बोर्ड रूम में शनिवार को कार्यपरिषद की बैठक कुलपति डॉ. सोनिया नित्यानंद की अध्यक्षता में बैठक हुई। बैठक में कु ल सचिव अर्चना गहरवार के स्थान पर उपकुलसचिव डॉ. संदीप भट्टाचार्या बैठक में मौजूद रहे। बैठक में डॉ. आमोद सचान का प्रकरण रखा गया, जिसमें प्राइवेट प्रैक्टिस समेत दूसरे आरोपों पर चर्चा की गयी। डॉ. सचान के जवाब से कार्यपरिषद संतुष्ट नहीं हुई। गहन मंथन के बाद कार्यपरिषद ने डा. सचान को बर्खास्त करने का निर्णय किया।

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बताते चले कि इससे पहले चार जुलाई को इमरजेंसी कार्यपरिषद की बैठक हुई थी। इसमें उन्हें 180 पेज की नोटिस देने पर फैसला हुआ था। छह दिन में नोटिस का जवाब देना था। उन्होंने जवाब देने के लिए अतिरिक्त समय मांगा। दस जुलाई को फिर इमरजेंसी कार्यपरिषद की बैठक हुई। कार्यपरिषद ने अतिरिक्त समय देने से इनकार कर दिया था।

इससे पहले पूर्व कुलपति डॉ. सरोज चूड़ामणि गोपाल के समय में भी प्राइवेट प्रैक्टिस का मामला उठा था। केजीएमयू प्रशासन ने वीडियोग्राफी कराई। जिसमें कई डॉक्टर प्राइवेट प्रैक्टिस करते हुए मिले थे, लेकिन किसी के खिलाफ प्राइवेट प्रेक्टिस के प्रकरण में दण्डात्मक कार्रवाई नहीं हुई। कुलपति डॉ. सोनिया नित्यानंद के कार्यकाल में भी कई डॉक्टरों पर प्राइवेट प्रैक्टिस के आरोप लगे। सभी डाक्टरों से प्राइवेट प्रेक्टिस न करने के शपथ-पत्र भी लिए गए।

केजीएमयू प्रवक्ता डा. के के सिंह का कहना है कि डॉ. आमोद कुमार सचान की लगभग तीन साल से प्राइवेट प्रैक्टिस समेत दूसरे मामले की जांच चल रही थी। कोर्ट का भी आदेश था। इसके लिए लगातार दो इमरजेंसी कार्यपरिषद की बैठक बुलाई गई थी। शनिवार को जांच रिपोर्ट के आधार पर डॉ. सचान को बर्खास्त कर दिया गया है। केजीएमयू में पहली बार प्राइवेट प्रैक्टिस को लेकर कार्रवाई की गई है।

कार्य परिषद के निर्णय के बाद डॉ. आमोद कुमार सचान का क कहना है कि मेरे खिलाफ दर्ज की गई यह शिकायत बिल्क ल झूठी, निराधार और मनगढ़ंत है। यह कार्रवाई रिटायरमेंट से तीन दिन पहले केवल मेरी छवि को धूमिल करने, व्यक्तिगत गरिमा को ठेस पहुंचाने के मकसद से की गई है। इसका उद्ेश्य केवल मुझे बदनाम करना और मानसिक रूप से प्रताड़ित करना है। उनका कहना है कि फार्माकोलॉजी विभाग के अध्यक्ष के रूप में कार्य किया है। अपने कार्यकाल के दौरान अनेक नवाचारी एवं प्रभावशाली पहलें शुरू की। इनमें प्रिस्क्रिप्शन ऑडिट, फार्माकोविजिलेंस सेंटर की स्थापना व डीएम फार्माकोलॉजी पाठ्यक्रम शामिल है। मैंने अपने जीवन के अमूल्य 23 वर्ष संस्थान को समर्पित किए हैं।

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