लखनऊ – मानसिक बीमारियों के इलाज से ज्यादा बेहतर हंै कि इसका बचाव किया जाए। शोधों में पता चलता है कि योग से मानसिक बीमारियों का इलाज आसान तरीके से किया जा सकता है। यह बात राज्यपाल राम नाईक ने इंडियन मनोरोग सोसाइटी का 71वां राष्ट्रीय वार्षिक सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए कही। यह सम्मेलन भारतीय मनोरोग विज्ञान विभाग के केंद्रीय आंचलिक शाखा, किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय तथा नूर मंजिल मनोरोग केंद्र के संयुक्त तत्वावधान मेंआयोजित किया गया। सम्मेलन में मानसिक बीमारियों में एंजाइटी डिशआर्डर सहित अन्य मानसिक बीमारियों पर चर्चा की गयी। राज्यपाल ने कहा कि अगर आंकड़ों को देखा जाए तो देश में मानसिक बीमारियां तेजी से बढ़ रही है। इन बीमारियों के बारे में भ्रम की भी स्थिति बनी रहती है। इसका इलाज विशेषज्ञ डाक्टर से ही कराये। परन्तु मानसिक बीमारियों से बचाव किया जा सकता है।
सम्मेलन में डॉ. ब्रिागेडियर एमएसवीके राजू ने बताया कि वर्ष 2016 में हुए सर्वे को देखा जाए तो 15 करोड़ लोग देश में किसी न किसी प्रकार की मानसिक समस्याओं से जूझ रहे हैं, जबकि 70 से 80 फीसद को समय पर इलाज नहीं मिल पा रहा है या तो लोगों को जानकारी ही नहीं है या फिर वे इलाज के लिए डॉक्टर तक पहुंच नहीं पा रहे हैं. जबकि 90 फीसद मानसिक रोगी डेंगू मलेरिया की तरह ही हैं। इनमें डिप्रेशन, एंजाइटी, ओसीडी, एडजस्टमेंट रिएक्शन, जैसी दिक्कते हैं जिन्हें दवाओं और काउंसलिंग के द्वारा ठीक किया जा सकता है। बड़ी बीमारियां सिर्फ 10 से 15 फीसद ही मरीजों में होती हैं। इसलिए जितनी जल्दी इलाज कराएं उतना ही ठीक रहता है।
केजीएमयू के डॉ. आदर्श त्रिपाठी ने कहा कि सोशल एंजाइटी डिस्आर्डर को काग्नीटिव बिहेवियर थेरेपी से ठीक किया जा सकता है। इस बीमारी में स्पीच देने से डरते हैं, अंजान लोगों से तथा पुरुष या महिला से बात करने में डरते हैं। इसके अलावा पब्लिक टायलेट में जाने से डर लगता है। उन्हें डर सताता रहता है कि कहीं कोई सवाल न पूछ ले, लीडरशिप से घबराते हैं, पता नहीं अगला सुनेगा या नहीं, नजर अंदाज तो नहीं करेगा, किसी को दे खते ही जुबान सूख जाती है। अगर यह सब लक्षण किसी में दिखते है तो सोशल एंजाइटी डिस्आर्डर के हो सकते है। ज्यादातर लोगों को जीवन में करीब 4 से 5 फीसद को ऐसी समस्याओं को सामना करना पड़ता है, जकि काउंसलिंग से इन्हें ठीक किया जा सकता है।
केजीएमू के साइकियाट्री विभााग के प्रमुख डॉ. पीके दलाल ने बताया कि सोशल एंजाइटी डिस्आर्डर सिर्फ एक फोबिया है. यह डिप्रेशन या एंजाइटी के कारण हो सकता है. इसी कारण मरीज काकरोच, छिपकली से, ऊंचाई से, ाीड़ ााड़ से, एग्जाम से, लाइट से, लि ट आदि से डरता है. ऐसे तमाम तरह के विकार हैं जिनके बारे में पता होना चाहिए कि ये मानसिक विकार हैं आैर सिर्फ काग्नीटिव बिहेवियर थेरेपी से इन समस्याओं को पूरी तरह से ठीक किया जा सकता है.
अब सभी डाक्टर कर सकेंगे डिप्रेशन का इलाज
डॉ. विनय कुमार ने बताया कि पिछले कुछ वर्षों में मानसिक समस्याओं में तेजी से बढ़ोत्तरी हुई है. देश में करीब 45 हजार साइकियाट्रिस्ट की जरूरत है. जबकि डॉक्टर सात हजार से कम हैं. इस कारण अब इंडियन साइकियाट्री सोसाइटी का प्रयास है कि एमबीबीएस कोर्स में ही साइकियाट्री चैप्टर की मात्रा को बढ़ाया जाए. जिससे वे सामान्य बीमारियों को ठीक कर सकें. सोसाइटी ने एमबीबीएस डॉक्टर्स के लिए आईएमए के साथ मिलकर कॉ बैट डिप्रेशन के नाम से ट्रेनिंग प्रोग्राम शुरु किया है. इसके लिए सर्टिफिकेट ाी जारी किया जाएगा। अगले एक दो माह इसे जारी किया जाएगा। इससे कोई ाी एमबीबीएस डॉक्टर डिप्रेशन जैसी समस्या का इलाज कर सकेगा और लोगों को आत्महत्या से बचा सकेगा. 2020 तक डिप्रेशन जान गंवाने का सबसे बड़ा कारण बनने जा रहा है। देश में करीब 15 परसेँट महिलाएं और 10 फीसद से ज्यादा पुरुष डिप्रेशन के शिकार हैं.
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