लखनऊ। गोमती नगर के डा. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान के हॉस्पिटल ब्लॉक में दवा का कमी होने से मरीज परेशान है। काफी संख्या में जीवनरक्षक दवा व इंजेक्शन अस्पताल में नहीं हैं। ऐसे में तीमारदारों को बाहर की दवा की दुकान से खरीदना पड़ रहा है। जल्द विलय होने के बाद संस्थान के हॉस्पिटल ब्लॉक में 467 बिस्तर हैं। आंकड़ों के अनुसार यहां पर प्रतिदिन छह हजार मरीज ओपीडी में आते है। हॉस्पिटल ब्लॉक में बजट की कमी से दवा खरीदारी नहीं हो पा रही है। पर्चे की दवा न मिलने पर मरीजों को दवाएं मेडिकल स्टोर से खरीदनी पड़ रही हैं। स्थिति यह है कि ओपीडी से लेकर इमरजेंसी तक कई महत्वपूर्ण दवा समाप्त हैं।
बताया जाता है कि यहां पर प्रसव के पहले महिलाओं को दिए जाने वाला इंजेक्शन प्लेसेंट्रक्स व वेंटिलेटर यूनिट में अचेत अवस्था में मरीज को दिए जाने वाला नॉरएडनॉलिन भी स्टॉक में खत्म हो गया है। इसके अलावा बच्चों को दी जाने वाली एंटीबायोटिक इंजेक्शन सीफापाइम भी नहीं रह गया। कार्डियक मरीजों को दी जाने वाली दवा कोंवार्सिल-एम, स्किन की फ्लूकोनाजोल, शुगर की ग्लिम प्राइट 2 एमजी, सूजन की सेरेसियोपेप्टीडेज, थायरॉयड की थायरॉक्स की दवा का स्टाक समाप्त हो गया। यह दवाएं मरीजों को शुक्रवार से खरीदनी पड़ रहीं हैं।
हॉस्पिटल ब्लॉक में आने वाले मेडिसिन, जनरल सर्जरी, आर्थोपेडिक, ईएनटी, नेत्र रोग विभाग, टीबी एंड चेस्ट, बाल रोग, ऑब्स एंड गाइनी विभाग के मरीज भर्ती होते हैं। यहां के वार्ड में भर्ती मरीजों को दवा, सामान बाहर से ही खरीदना पड़ रहा है। इस बारे में संस्थान के निदेशक डॉ. एके त्रिपाठी ने जल्द व्यवस्थाएं सही हो जाएगी। विलय के बाद समस्याओं का निराकरण के लिए पूरी कोशिश की जा रही है।
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