लखनऊ। प्रदेश सरकार ने लोहिया संस्थान को उच्चस्तरीय न्यूरो साइंस सेंटर बनाने के लिए बजट जारी कर दिया है, तो दूसरी ओर देश के तीन न्यूरो सर्जरी के उच्चस्तरीय चिकित्सा संस्थानों में प्रदेश के डा. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान शामिल हो गया है। लोहिया संस्थान में एंडोवस्कुलर इंटरवेंशन न्यूरोसर्जरी तकनीक से मरीजों का इलाज सफलता पूर्वक किया जा रहा है। इस उच्चस्तरीय तकनीक का प्रयोग वर्तमान में जीबी पंत अस्पताल नई दिल्ली, एसएमएस इंस्टीट्यूट जयपुर मेंमरीजों का इलाज किया जाता है।
लोहिया संस्थान में लगभग चार वर्षो से ब्रोन स्ट्रोक, हैमरेज या ब्रोन ट्यूमर के इलाज में मस्तिष्क में बिना चीरा लगाए सर्जरी मरीजों की जा रही है। इस तकनीक में विशेषज्ञ तैयार करने के लिए संस्थान देश मे पहली बार फेलोशिप कार्यक्रम चला रहा है। न्यूरो सर्जरी विभाग के प्रमुख डा. दीपक सिंह बताते है कि लोहिया संस्थान में एंडोवस्कुलर इंटरवेंशन न्यूरोसर्जरी के लिए जून 2022 से फेलोशिप कार्यक्रम की शुरुआत की जा चुकी है। उन्होंने बताया कि इंटरवेंशन न्यूरोसर्जरी के इस फेलोशिप के लिए देशभर के चिकित्सा संस्थानों से 26 डाक्टर्स अभ्यर्थियों ने आवेदन भरा था। इनमें एम्स नई दिल्ली के भी तीन अभ्यर्थी शामिल थे। इसके अलावा केजीएमयू, लोहिया समेत कुछ अन्य चिकित्सा संस्थानों से न्यूरोसर्जरी विधा में एमसीएच कर चुके अभ्यर्थियों ने आवेदन किया था।
एंडोवस्कुलर इंटरवेंशन न्यूरोसर्जरी तकनीक के इस फेलोशिप कार्यक्रम में बिना चीरा लगाए दिमाग में होने वाले ब्रोन स्ट्रोक, गंभीर ट्यूमर के इमबोलाइजेशन, एनुरिस्म (नसों के फूलने) में क्वाइलिंग की तकनीक से सर्जरी करने में महारत सिखायी जाती है।
डा. सिंह बताते है कि लोहिया संस्थान में वर्ष 2018 से इस तकनीक से सर्जरी हो रही है। डा. दीपक की मानें तो प्रतिमाह लगभग 60 से 70 मरीजों की सर्जरी की जाती है। इसमें मरीज की सर्जरी में कम समय लगता है और मरीज जल्दी रिकवरी करता है












