लिवर गया यहां, किडनी प्रत्यारोपित हुई…

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लखनऊ। किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय के विशेषज्ञों ने रविवार को 23 ब्रेनडेड मरीज का अंगदान करा कर लिवर व किडनी प्रत्यारोपण से मरीजों को अंगदान करने की कवायद की है। ब्रोनडेड मरीज का ग्रीनकारीडोर बनाकर विमान से लिवर को दिल्ली के एम्स को भेजा गया है, इसके साथ ही किडनी को संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान (एसजीपीजीआई) भेज दिया गया है, जहां पर किडनी प्रत्यारोपण करने की तैयारी भी शुरू कर दी गयी थी। इसके अलावा कार्निया को संस्थान के आई बैंक में रखा गया है। केजीएमयू में अब तक 23 मरीजोें को जागरूक करके 42 किडनी व 19 लिवर सफलता पूर्वक प्रत्यारोपण के लिए निकाले जा चुके है।

केजीएमयू प्रशासन के अनुसार रायबरेली के अमर नगर निवासी 25 वर्षीय निवेश मिश्रा उर्फ राजा बीते दो जनवरी को अपनी बाइक से शाम सात बजे घर आ रहे थे, तभी रास्ते में गड्ढ़ा बचाने के चक्कर में गाड़ी का ब्रोक लगाया, तो वह सिर के बल सड़क पर गिर गए। आनन-फानन में स्थानीय डाक्टरों को दिखाया, जहां पर डॉक्टरों ने युवक की हालत गंभीर बताते हुए केजीएमयू के लिए रेफर कर दिया। रात करीब 11 बजे मरीज को लेकर ट्रॉमा सेंटर परिजन पहुंचे। यहां डॉक्टरों ने जांच के बाद मरीज को वेंटिलेटर की आवश्यकता बताते हुए दूसरे अस्पताल ले जाने का परामर्श दिया। उनका कहना था कि वेंटीलेटर अभी खाली नहीं है, जब खाली होने पर सूचना दे दी जाएगी, इसके बाद परिजनों ने निकट के अस्पताल में भर्ती करा दिया।

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दूसरे दिन मरीज को ट्रॉमा सेंटर में वेंटीलेटर खाली होने के मरीज को बुलाकर वेंटीलेटर पर भर्ती कर लिया गया। वेंटिलेटर पर भर्ती के बाद उसे ब्रोन डेड घोषित कर दिया। इससे परिजन बहुत निराश हो गये, ब्रोन डेड युवक के परिजनों को कांउसलरों ने अंगदान के लिए समझाने का प्रयास किया। आर्गन ट्रांसप्लांट विभाग के कांउसलर ने परिजनों को अंगदान करने के बारे में जानकारी देते हुए पांच मरीजों को नई जिंदगी देने की बात कही। कांउसलरों की बात से युवक के पिता कृष्ण मुरारी मिश्रा जो रोडवेज में परिचालक है, माता गीता मिश्रा व बड़ेे भाई डॉ. विश्रेय मिश्रा सहमत हो गए और उन्होंने रविवार की सुबह ब्रोन डेड युवक के अंगों को दान करने का निर्णय ले लिया।

परिजनों द्वारा सहमति मिलने के बाद दोहपर बाद से ही विशेषज्ञों ने उनके अंगों को निकालने की तैयारी शुरू कर ली थी। रविवार गैस्ट्रो सर्जरी विभाग के प्रमुख प्रो. अभिजीत चन्द्रा, डॉ. विवेक गुप्ता, डॉ. मनमीत सिंह ने युवक के अंगों को निकालने का काम शुरू किया। डॉ. अभिजीत चंद्रा युवक के लीवर को एक बॉक्स में लेकर दिल्ली रवाना हो गए। साथ ही कार्निया केजीएमयू के नेत्र रोग विभाग को दे दी गई। किडनी पीजीआई में दो मरीजों में ट्रांसप्लांट करने के लिए भेज दिया। जहां पर दो मरीजों को किडनी प्रत्यारोपण की तैयारी शुरू कर दी गयी।


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