केजीएमयू: डा खत्री एम्स जाये,लेकिन इस्तीफा या वीआरएस लेकर

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लखनऊ। किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय में बृहस्पतिवार को 41वीं कार्यपरिषद की बैठक हंगामेदार रही। बैठक में लिए गये निर्णयों में चिविवि नये राजकीय मेडिकल कालेजों को दान में मिली कैडेवर देगा। इसके लिए कालेजों को शुल्क देना होगा। इसके साथ ही मॉलीक्यूलर बॉयालोजी लैब सेन्टर फॉर एडवान्स रिसर्च विभाग की सह आचार्य डॉ. नीतू सिंह के खिलाफ चल रहे अनुशासनहीनता के मामले की जांच कर रही कमेटी में महिला सदस्य भी होंगी। बर्न यूनिट में मैन पावर तैनाती के साथ ही क्वीन मेरी में एमसीएच यूनिट में आउट सोर्सिग से तैनाती की अनुमति कार्यपरिषद ने संस्तुति कर दी है।
किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय कार्यपरिषद की बैठक बाल रोग विभाग की पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो. पीके मिश्रा की शोक सभा से शुरू हुई। सदस्यों ने प्रो. मिश्रा को श्रद्धांजलि दी। बैठक में डॉ. आशीष वाखलू सबसे अधिक चर्चा का विषय माना जा रहा था। इस पर कार्यपरिषद ने डॉ. आशीष वाखलू के आरोप पत्र का अनुमोदन कर दिया, जबकि प्रो. वेद के मामले में इस बात पर सहमति बनी कि उन पर हुई एफआईआर पर चिविवि प्रबंधन विधिक राय ले और जो भी निर्णय लिया जाए उसे कार्य परिषद स्वीकार करे।

मॉलीक्यूलर बॉयालोजी लैब सेन्टर फॉर एडवान्स रिसर्च विभाग की सह आचार्य डॉ. नीतू सिंह के खिलाफ चल रहे अनुशासनहीनता के मामले की जांच कर रही कमेटी में महिला सदस्य भी होंगी। बताते चले कि पिछले डॉ. सिंह द्वारा महिला सदस्यों को कमेटी में शामिल करने की मांग की गयी थी। प्रास्थोडॉन्टिक्स विभाग के कार्यवाहक विभागाध्यक्ष डॉ. पूरन चन्द के प्रकरण में विवि विधिक राय लेगा। कार्य परिषद ने यह भी कहा कि विवि स्तर से किसी भी अन्य चिकित्सा दन्त व नर्सिंग एवं पैरामेडिल संस्थान के किसी भी छात्र को कार्यपरिषद के अनुमोदन के बिना दाखिला नहीं दिया जाएगा। इसके लिए उन्हें एनओसी लेनी होगी। बैठक में निर्णय लिया गया कि फार्माकलॉजी विभाग के डॉ. संजय खत्री गोरखपुर एम्स जाना चाहते है। डॉ. खत्री वीआरएस या सशर्त इस्तीफा देकर ऑल इण्डिया इन्स्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइन्सेज गोरखपुर में नौकरी करने जा सकते हैं। इसके अलावा सेवा प्रदाता एजेन्सी के माध्यम से पूर्व से तैनात कार्मिकों की सेवाएं जो गत 31 दिसम्बर को समाप्त हो चुकी है। उसे आगामी 30 अप्रैल तक विस्तार देने का निर्णय लिया गया। कार्य परिषद ने एक कैडेवर मामले में महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए कहा गया कि केजीएमयू को दान मिले कैडेवर (मानव देह) को नये स्थापित राजकीय मेडिकल कालेजों को छात्रों की पढ़ाई के लिए दिया जा सकता है। बशर्ते उन्हें यह आश्वासन देना होगा कि वह कैडेवर का व्यवसायिक प्रयोग नहीं करेंगे।

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