लखनऊ। कानपुर में किडनी-लिवर ट्रांसप्लांट रैकेट का भंडाफोड़ हुआ है। किडनी-लिवर ट्रांसप्लांट के बड़े रैकेट का सोमवार को डीसीपी वेस्ट की क्राइम ब्रांच और स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त टीम ने भंडाफोड़ किया है। ट्रांसप्लांट करने वाले डॉक्टर टीम का लखनऊ से जुड़ा कनेक्शन पाया गया है। लखनऊ में जांच पड़ताल तेज कर दी गई है।
केशवपुरम के एक अस्पताल का संचालक दंपति रैकेट का मास्टरमाइंड मिला है। यह लोग पहले फुसलाकर और जरूरतमंदों को आठ से 10 लाख रुपये में डोनर तैयार करते थे , जब कि 80 लाख रुपये तक में रिसीवर के किडनी व लिवर ट्रांसप्लांट करते थे। खास बात यह है दिल्ली व लखनऊ से आई डॉक्टरों की टीम ट्रांसप्लांट करती थी।
इसके बाद डोनर और रिसीवर को कल्याणपुर के ही दो अन्य अस्पतालों में भर्ती करा दिया जाता था। पुलिस ने डॉक्टर दंपति और एक दलाल को हिरासत में लिया है। साथ ही डोनर और रिसीवर को भी अपने सुरक्षा में लेकर इलाज करा रही है। वहीं, तीनों अस्पतालों में देर रात तक जांच चलती रही।
कानपुर वेस्ट जोन के रावतपुर के केशवपुरम स्थित आहूजा हॉस्पिटल में अवैध तरीके से किडनी और लिवर ट्रांसप्लांट करने की सूचना पुलिस आयुक्त को दी गई थी। पुलिस आयुक्त के निर्देश पर सोमवार देर शाम तीन अस्पतालों में क्राइम ब्रांच और स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त टीमों
ट्रांसप्लांट रैकेट के खुलासे के बाद कानपुर के केशवपुरम स्थित आहूजा अस्पताल में सोमवार शाम डोनर को पुलिस ने सुरक्षा घेरे में ले लिया।
GC किडनी ट्रांसप्लांट के काले धंधे की सूचना पर पुलिस ने स्वास्थ्य विभाग से सहयोग मांगा था। केशवपुरम स्थित आहूजा हॉस्पिटल, कल्याणपुर के प्रिया व मेटलाइफ हॉस्पिटल में जांच की गई है। फिलहाल अभी जांच पड़ताल की जा रही है। बताया जाता है लखनऊ में अभी जांच पड़ताल के बाद गिरफ्तारी संभव ह।
आहूजा अस्पताल संचालक डॉक्टर दंपति और एक ब्रोकर को एसटीएफ ने हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की तो खेल की परतें उघड़ने लगीं। जांच में पता चला कि आहूजा हॉस्पिटल में किडनी ट्रांसप्लांट हुआ है। यहां ऑपरेशन करने के बाद डोनर और रिसीवर को कल्याणपुर के प्रिया और मेटलाइफ हॉस्पिटल में भेज दिया गया। सूत्रों की मानें तो लंबे समय से पुलिस इस रैकेट के खुलासे में लगी थी। क्राइम ब्रांच ने उत्तराखंड के आयुष नाम के रिसीवर और एक डोनर को भी अपनी सुरक्षा में लिया है। पुलिस सूत्रों के मुताबिक डोनर को साढ़े तीन लाख रुपये यूपीआई से और छह लाख रुपये कैश दिए गए थे। वहीं आयुष से 80 लाख रुपये तक की रकम वसूली गई.












