लखनऊ। बाराबंकी के मरीज की किडनी चोरी प्रकरण मामले में कही किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय को बदनाम करने की साजिश तो नहीं थी। ताकि इस आरोप से यहां के डाक्टरों को बदनाम किया जा सके। ऐसा किडनी चोरी प्रकरण की जांच रिपोर्ट आने के बाद दोनों डाक्टरों के आरोप मुक्त होने के बाद प्रतीत होता है। यह जानकारी किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय के मुख्य प्रवक्ता डा. नरसिंह वर्मा व मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डा. एस एन शंखवार ने संयुक्त रूप से आयोजित पत्रकार वार्ता में दी।
पत्रकार वार्ता में आरोप मुक्त सर्जन डा. संदीप तिवारी व डा आनंद मिश्र भी मौजूद थे। दोनों डाक्टरों ने एक मत से किडनी चोरी प्रकरण में मरीज द्वारा लगाये गये आरोपों व बाराबंकी पुलिस द्वारा जल्दबाजी में बिना जांच रिपोर्ट के गंभीर धाराओं में रिपोर्ट दर्ज करने की जांच कराने की मांग की। उनका आरोप है कि यह एक गंभीर साजिश प्रतीत होती है।
मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डा. एस एन शंखवार ने कहा कि किडनी चोरी प्रकरण में मरीज एक बार भी नहीं किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय नहीं आया था शिकायत करने के लिए। उसने सीधे एक अल्ट्रासाउंड की रिपोर्ट के आधार पर किडनी चोरी का आरोप लगा दिया। पीजीआई के पूर्व निदेशक व किडनी प्रत्यारोपण विशेषज्ञ डा. आर के शर्मा ने नेतृत्व में बनी चार सदस्यीय कमेटी ने गहन जांच पड़ताल में पाया कि किडनी सर्जरी के दौरान निकाली नही गयी थी। बल्कि वह सिकु ड़ी होने के कारण अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट में पता नहीं हो पाया था।
किडनी चोरी प्रकरण में आरोप मुक्त हुए डा. संदीप तिवारी ने कहा कि इस प्रकरण में गंभीर साजिश प्रतीत होती है। इसकी जांच करायी जानी चाहिए। डा. आनंद मिश्र ने कहा कि जिस तरह से आरोप व पुलिस में रिपोर्ट दर्ज करायी गयी। उससे लग रहा था कि हमने मरीज की जान बचाना एक गुनाह हो गया था। पत्रकार वार्ता में चिकित्सा अधीक्षक डा. विजय कुमार व प्राक्टर डा. आर ए एस कुशवाहा भी मौजूद थे।