लखनऊ। मोटापा को कम करने के लिए लोग खाना पीना छोड़ देते है। ऐसे मेंे खाली पेट रहने से ग्रेलीन नामक हार्मोन का स्तर शरीर में बढ़ने लगता है। लगातार भूख बढ़ने से लोग ज्यादा खा लेते है आैर उल्टा वजन बढ़ जाता है। अगर देखा जाए तो देश में मोटापा कम करने के लिए तीन करोड़ से ज्यादा लोगों को बैरियाटिक सर्जरी की आवश्यकता है। बैरियाट्रिक सर्जरी भी विशेषज्ञ डाक्टर से ही कराना चाहिए। यह जानकारी अहमदाबाद डा.महेन्द्र नरवरिंंया ने संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान में आयोजित 21 वें गैस्ट्रो सर्जिकल कार्यशाला में दी। कार्यशाला में अन्य विशेषज्ञों ने पित्ताशय थैली की सर्जरी सहित अन्य सर्जरी की भी जानकारी दी।
डा. महेन्द्र ने बताया कि ज्यादातर लोग मोटापा कम करने के लिए लोग डाइटिंग शुरू कर देते है। ऐसे में खाना को बिल्कुल छोड़ देते है। ऐसे में खाली पेट ग्रेलीन नामक हारमोन शरीर में बढने लगता है आैर इसके चक्कर में लोग ज्यादा खाना खा लेते है। उन्होंने बताया कि ज्यादा खाना ही वजन या मोटापा बढ़ाने के लिए जिम्मेदार नहीं है, जितना श्रम करके कैलोरी निकाल सकते है उतना ही भोजन का सेवन करना चाहिए। उन्होंने बताया कि अगर देखा जाए तो देश में तीन करोड़ लोगों को लोगों को बैरियाट्रिक सर्जरी की जरूरत है।
उन्होंने बताया कि इस सर्जरी में आमाशय के आकार को कम कर देते है,इस सर्जरी में भी जरा सी चूक होने पर दोबारा सर्जरी की जरूरत पड़ जाती है। सर्जरी के दौरान आमाशय बड़ा होने पर स्टेपलर के बार-बार प्रयोग आमाशय को छोटा करते है। ऐसे में वहां से लीकेज होने की आशंका रहती है। इस कारण दोबारा सर्जरी की जरूरत हो सकती है। कार्यशाला में प्रो. राजन सक्सेना ने बताया कि पित्त की थैली में पथरी होने पर थैली ही निकाल ली जाती है। इस थैली को कम निकालते वक्त एक फीसदी लोगों में बाइल डक्ट में इंजरी हो जाती है। ऐसे मामलों में आंत से बाइल डक्ट बनाना पड़ता है। उसको भी बनाने के बाद कहां आैर कैसे जोडने में तकनीकी चूक से मरीज की जान पर बन सकती है।















