लखनऊ । किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय के जनरल सर्जरी विभाग में पहली बार रोबोटिक तकनीक से हेपेटिकोजेजुनोस्टॉमी सफल सर्जरी की गयी है। मरीज बार-बार पीलिया, उल्टी और पेट में भीषण दर्द से पीड़ित था । विशेषज्ञ डॉक्टरों ने डा.अवनीश के नेतृत्व में जटिल रोबोटिक सर्जरी कर दिक्कतों से निजात देने में कामयाबी हासिल की है। समय पर सर्जरी कर महिला मरीज का लिवर खराब होने से बच गया। रोबोटिक सर्जरी के बाद मरीज पूरी तरह से स्वस्थ है।
रोबोटिक सर्जरी करने वाले विशेषज्ञ डा. अवनीश ने बताया कि आजमगढ़ निवासी 21 वर्षीय महिला को बार-बार पीलिया हो रहा था। पेट में दर्द और बार-बार उल्टी हो रही थी। कुछ समय पहले महिला ने स्थानीय अस्पताल में पित्त की थैली में पथरी का सर्जरी कराया था। सर्जरी के दौरान पित्त की नली में इंजरी हो गई । क्लीनिकल आंकड़ों में यह समस्या तीन से चार प्रतिशत मरीजों में देखने को मिलती है। चोट लगने से नली में सिकुड़न आ गई थी। जिससे पित्त का सामान्य प्रवाह बाधित हो गया। क्लीनिकल सांइस में इसे बाइल्ड डक्ट स्ट्रिक्चर कहते हैं। इस कारण से मरीज को गंभीर समस्या हो गई थीं।
उन्होंने बताया कि परिजन मरीज को लेकर जनरल सर्जरी विभाग पहुंचे। यहां उन्होंने ने मरीज को देख कर जरूरी जांच कराई। मरीज का दोबारा सर्जरी का निर्णय लिया गया । रोबोटिक सर्जरी तकनीक से सर्जरी कराने की सलाह दी। परिजन सर्जरी को राजी हो गए। विशेषज्ञ डॉक्टरों ने रोबोटिक तकनीक से सर्जरी पित्त की नली को छोटी आंतों से जोड़ा । सर्जरी की इस तकनीक को रोबोटिक रूएक्स ईएन वाई हेपेटिकोजेजुनोस्टॉमी कहते हैं। उन्होंने बताया कि लगभग चार घंटे सर्जरी चली । नली में चोट लगे भाग को ठीक किया गया। इस अत्याधुनिक प्रक्रिया में पित्त नली को छोटी आंत (जेजुनम) के एक हिस्से से जोड़ा जाता है, ताकि लिवर से पित्त का प्रवाह सामान्य रूप से बना रहे। रोबोटिक तकनीक के उपयोग से सर्जरी अधिक सटीक, सुरक्षित और कम चीर-फाड़ वाली साबित हुई। सल कर बाद मरीज पूरी तरह से ठीक है। इलाज में देरी से मरीज का लिवर तक फेल हो सकता था।
डॉ. अक्षय आनंद ने बताया की सर्जरी बामुश्किल 20 से 25 हजार रुपये खर्च आया है। प्राइवेट अस्पताल में इस ऑपरेशन पर चार से पांच लाख रुपये खर्च आता।
यह हैं रोबोटिक सर्जरी टीम के सदस्य
डॉ. अवनीश कुमार, डॉ. अक्षय आनंद, डॉ. पंकज कुमार, डॉ. अमित कर्णिक, रेजिडेंट डॉ. हेमंत, डॉ. गार्गी, डॉ. कौशिक, डॉ. ज्योति, डॉ. इंद्रनील, डॉ. आशीष, डॉ. आदित्य, डॉ. याशी, डॉ. अदनान, डॉ. श्रेया, एनेस्थीसिया टीम में डॉ. अजय चौधरी, डॉ. अभिषेक राजपूत, डॉ. अंजना, ओटी सहायक मयंक शामिल थे।












