लखनऊ। किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय में मेडिकल स्टोर के कर्मचारी मरीजों की यूएचआईडी नम्बर से दवाओं को लेकर ब्लैक कर रहे थे। इसका पूरा काकस बना हुआ है। यह मेडिकल स्टोर से मंहगी दवाअों को सस्ती दरों पर निकाल कर बाजार में बेच रहे थे। हालांकि केजीएमयू प्रशासन की जांच टीम ने पहले दिन आठ संविदा कर्मचारियों को प्राथमिक जांच में ही पकड़ा आैर उन्हें नौकरी से निकाल दिया गया है। जांच को आैर गहराई से किया जा रहा है। बताया जाता है कि अभी कई लोगों पर गाज गिर सकती है।
केजीएमयू में गरीब मरीजों को सस्ती उच्चस्तरीय दवाएं देने के लिए हॉस्पिटल रिवॉल्विंग फंड (एचआएफ) के मेडिकल स्टोर खोले गए हैं। इसके तहत 13 मेडिकल स्टोर का संचालन हो रहा है। विभागवार यह मेडिकल स्टोर संचालित किये जा रहे, ताकि ओपीडी व भर्ती मरीजों को सस्ती दवा के लिए भटकना न पड़े। इन मेडिकल स्टोर पर मरीजों को 80 प्रतिशत तक सस्ती उच्चस्तरीय दवा व इम्प्लांट मिल रहे हैं।
यहां पर मरीजों की सस्ती दवा पर कर्मचारियों ने दलालों का काकस बना हुआ है। होता यह है कि मरीज के पंजीकरण के दौरान यूएचआईडी नम्बर आवंटित किया जाता है। इस नम्बर के अनुसार मरीज की जांचें और दवाएं मिलती हैं। सस्ती दवाएं बिना पंजीकरण किसी अन्य मरीजो को नहीं मिल सकती है। बस यही पर मेडिकल स्टोर पर तैनात कर्मचारी मरीजों की यूएचआईडी नम्बर से खेल जाते हैं। डॉक्टर के परामर्श पर दवाएं मरीज के यूएचआईडी नम्बर के आधार पर दवाएं निकालने के बाद दलाल यही दवाएं बाजार में बेच देते हैं। इसमें सबसे ज्यादा दिक्कत गरीब मरीजों को होती है। जरूरत पड़ने पर यह मरीजों को सस्ती दवाएं नहीं मिल पा रही हैं। मरीज बाजार से दवाएं खरीदने को मजबूर होते हैं। केजीएमयू के ही मेडिकल स्टोर से सस्ती दवाओं की ब्लैक मार्केटिग शुरू हो जाती है।
बताया जाता है कि जब दवा कंपनियों ने केजीएमयू के उच्च अधिकारियों से इस बड़े घोटाले की जानकारी दी। कंपनी ने शिकायत ही नहीं बल्कि आपूर्ति बैच की दवाओं की बाजार में बिक्री संबंधी सुबूत भी दे दिये। तब केजीएमयू के जिम्मेदारी अधिकारियांें ने जांच कराने का आनन-फानन में दिशा निर्देश दिया।















