लखनऊ। केजीएमयू के ब्राउन हाल में बुधवार को इंटरनेशनल कोलैबोरेटिव रिसर्च ऑन अनोरेक्टल ट्रांसप्लांटेशन विषय पर विशेषज्ञों ने जानकारी साझा की। इस दौरान केजीएमयू के डिपार्टमेंट ऑफ सर्जिकल गैस्ट्रोएंट्रोलोजी के प्रमुख डॉ. अभिजीत चंद्रा ने बताया कई बार दुर्घटना के दौरान या कैंसर के मामले में मानव मल का रास्ता खराब हो जाता है। वहीं ऐसी समस्याएं महिलाओं को बच्चेदानी में भी आ जाती है। जिसको केजीएमयू में एनल रिकंस्ट्रक्शन के द्वारा ठीक किया जाता है। इसमें पेट में इंट्रोपायोरल (अमाशय का हिस्सा) को एनल कैनाल को नीचे से जोड़ देते हैं। जिससे मल का रास्ता ठीक हो जाता है।
डा. अभिजीत ने बताया कि केजीएमयू में अभी तक २५ मरीजों का इस तरह से इलाज किया जा चुका है। केजीएमयू में हुई इस सर्जरी को अमेरिकन सोसायटी ऑफ कोलन रेक्टल में साल २०१६ में प्रकाशित किया जा चुका है। उन्होंने बताया कि यूनिवर्सिटी ऑफ टोकियो डिपार्टमेंट ऑफ रीकंस्ट्रक्टिव सर्जरी के डॉ. जुन अराकी केजीएमयू में हो रहे एनल रिकंस्ट्रक्शन पर अध्ययन करने के लिए केजीएमयू आए हैं। इससे पहले डा.जुन अराकी जापान में कैडेवर में हो रहे विभिन्न अंगों के ट्रांसप्लांट को लेकर डॉक्टरों से चर्चा किया। कार्यशाला में बोलते हुए डॉ. जुन अराकी ने बताया कि वह सुपर माइक्रोस्कोप के जरिए विभिन्न अंगों के ट्रांसप्लांट कर रहे हैं।















