किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय में प्राइवेट प्रैक्टिस पर लगाम लगाने की जिम्मेदारी अब डीन को सौंप दी गयी है। केजीएमयू कुलपति प्रो. एमएलबी भट्ट के नये निर्देश में मेडिसिन व डेंटल डीन को कहा गया है कि किसी भी डाक्टर के खिलाफ अगर प्राइवेट प्रैक्टिस की शिकायत मिले तो कार्रवाई करने के साथ ही केजीएमयू प्रशासन को सूचित करें।
केजीएमयू में डाक्टरों के प्राइवेट प्रैक्टिस करने का सिलसिला थम नहीं रहा है। यहां पर सर्जरी, मेडिसिन, एनेस्थिसिया, बाल रोग, गैस्ट्रो, न्यूूरो विभाग सहित अन्य विभाग के डाक्टरों पर भी प्राइवेट प्रैक्टिस करने का आरोप लगा है। कुछ दिन पहले कैंसर संस्थान के एक डाक्टर का प्राइवेट प्रैक्टिस करते हुए वीडियो वायरल भी हुआ था। कार्रवाई के नाम केजीएमयू प्रशासन ने डाक्टर की शिकायत को नजर अंदाज कर दिया। ऐसा पहले बार नहीं हुआ है।
इससे पहले भी पूर्व कुलपति प्रो. सरोज चूड़ामणि ने लभगभ दो दर्जन से ज्यादा डाक्टरों के खिलाफ प्राइवेट प्रैक्टिस का सबूत एकत्र किया था, लेकिन जांच के नाम पर कोई कार्रवाई नहीं हुई, मामला अभी तक फाइलों में दबा हुआ है। बताया जाता है कि शासन के निर्देश के बाद केजीएमयू प्रशासन ने भी प्राइवेट प्रैक्टिस रोकने के लिए डाक्टरों से अपील की, लेकिन कोई प्रभाव नही पड़ा, लगातार डाक्टर प्राइवेट प्रैक्टिस कर रहे है। काफी संख्या में डाक्टर निजी अस्पतालों में सर्जरी से लेकर ऑन काल मरीजों का इलाज करने जा रहे है।
इसकी शिकायत भी केजीएमयू प्रशासन के पास है लेकिन कोई कार्रवाई नही हो रही है। वर्तमान में एक बार फिर केजीएमयू प्रशासन ने मेडिसिन व डेंटल यूनिट के डीन को निर्देश दिया है कि कोई डाक्टर प्रैक्टिस करते मिले या शिकायत आये तो उसकी जांच कराये।















