लखनऊ। किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय में लंग प्रत्यारोपण करने की कवायद हो रही है , इसके यूनिट निर्माण शुरू किया जा चुका है। यह बात केजीएमयू कुलपति प्रो.सोनिया नित्यानंद ने शताब्दी भवन प्रेक्षागृह में एआईपीकॉन 2026 में सम्बोधित करते हुए कहीं। इसके अलावा केजीएमयू पल्मोनरी एंड क्रिटिकल केयर मेडिसिन विभाग प्रमुख डॉ. वेद प्रकाश ने बताया कि फेफड़े का कैंसर अक्सर चुपके से शरीर पर हावी हो जाता है। बीमारी की शुरुआत में कोई स्पष्ट लक्षण नजर नहीं आते। यही कारण है कि मरीज अक्सर देर से डॉक्टर के पास पहुंचते हैं। आधुनिक जांच व इलाज से बीमारी पर काबू पाना काफी हद तक आसान हो गया है।
डॉ. वेद प्रकाश ने कहा कि फेफड़े के कैंसर के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। इसमें मरीज को लगातार खांसी, थकान, सांस लेने में फेफड़ों में संक्रमण हो सकता है। हालांकि ये लक्षण आम सर्दी-खांसी या धूम्रपान से जुड़ी समस्याओं के साथ भी मिल सकते हैं। इस कारण अक्सर लोग इन्हें नजरअंदाज कर देते हैं। उन्होंने बताया कि शुरु में ट्यूमर की आकार छोटा होता है। इस नाते लक्षण नजर नहीं आते हैं। जैसे-जैसे कैंसर बढ़ता है, मरीज को खून वाला बलगम, सीने में दर्द और सांस लेने में कठिनाई महसूस होती है।
उन्होंने कहा कि केजीएमयू में फेफड़े के कैंसर की पहचान और आधुनिक इलाज उपलब्ध है। दिल्ली स्थित पटेल चेस्ट इंस्टीट्यूटी के पूर्व निदेशक डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने कहा कि समय पर सीटी स्कैन, बायोप्सी और अन्य इमेजिंग तकनीक से रोग की पहचान की जा सकती है। समय पर सटीक इलाज से बीमारी पर काबू पाया जा सकता है।











