लखनऊ। किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय के डॉक्टरों( चिकित्सक शिक्षक) ने पीजीआई के समान वेतन भत्ते न दिये जाने पर आक्रोश व्यक्त किया है। डॉक्टरों का आरोप है कि जिम्मेदार अधिकारी केजीएमयू को नजरअंदाज कर रहे हैं। अगर ऐसा न होता, लोहिया संस्थान के साथ ही केजीएमयू के डॉक्टरों को भी पीजीआई के समान वेतन भत्ते देने का आदेश निर्देश जारी कर देना चाहिए था।
शनिवार को केजीएमयू शिक्षक संघ के कार्य समिति की बैठक आयोजित की गयी। बैठक में कार्यसमिति के सदस्य शामिल हुए। बैठक में संघ के महासचिव डॉ. संतोष कुमार ने कहा कि केजीएमयू में लगभग 450 डॉक्टर( चिकित्सक शिक्षक) हैं। डाक्टरों पर मरीजों के चिकित्सा के अलावा मेडिकोज को पढ़ाने के लिए क्लासेज भी लेना शामिल है। उन्होंने कहा कि सरकार की नियमावली में स्पष्ट प्रावधान होने के बाद भी पीजीआई के समान वेतन, भत्ते के अलावा अर्जित अवकाश नहीं दिया जा रहा है।
सातवें वेतनमान का संसोधित पे-मेट्रिक्स एसजीपीजीआई को देने के साथ ही लोहिया संस्थान को पहली फरवरी 2022 को दे दिया गया है। केजीएमयू के लिए अभी तक आदेश जारी नहीं किया गया है। उन्होंने कहा कि इस सम्बंध में 17 फरवरी को चिकित्सा शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव से वार्ता की जाएगी। फिर भी यदि केजीएमयू के वेतन भत्तों से संबंधित आदेश जारी नहीं हुआ, तो बैठक करके आगे की रणनीति बनाएंगे। उन्होंने बताया कि इस सम्बधं में इक्कीस फरवरी को संघ की आम सभा बुलायी गयी है। बैठक में डाक्टरों ने कहा कि कोरोना काल में तथा पूर्व में डॉक्टरों को शीतकालीन व ग्रीष्मकालीन के बदले में अर्जित अवकाश दिए जाने का निर्णय कार्य परिषद में लिया गया था। अभी तक अर्जित अवकाश भी नहीं दिया गया है। इसी प्रकार कुछ डॉक्टरों को पीजीआई की तर्ज पर वाहन भत्ता नहीं दिया जा रहा है, जिसके समाधान के लिए भी कुलपति व कुलसचिव से सोमवार को वार्ता की जाएगी। डाक्टरों का आरोप है कि शासन से लेकर केजीएमयू के अधिकारी भी उनकी समस्या को नजर अंदाज कर रहे है।












