कंगारू मदर केयर एक प्रभावशाली प्रक्रिया : रीता

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लखनऊ – नवजात शिशु मृत्यु दर में गिरावट लाने के लिए के.एम.सी. यानि कंगारू मदर केयर एक प्रभावशाली प्रक्रिया है. इसके साथ ही यह पूरी तरह मुफ्त है. यह कहना है परिवार कल्याण मंत्री प्रोफसर रीता बहुगुणा जोशी का. मंत्री ने बुधवार को 101 के.एम.सी. लाउन्ज का लोकार्पण किया.

मंत्री रीता ने कहा कि पिछले 40 वर्षों से के.एम.सी. की प्रभावशीलता के वैज्ञानिक प्रमाणों के बावजूद विश्वभर में इसके विस्तार में बहुत कम सफलता मिली है. परन्तु भारत में खासकर उत्तर प्रदेश में हमारी सरकार इसको सभी स्वास्थ्य केन्द्रों तक चालू करवाने के लिए प्रतिबद्ध है. और अब यह पूरी दुनिया के लिए एक मिसाल के रूप में जाना जा रहा है. उन्होंने वहां मौजूद मिशन निदेशक पंकज कुमार को जल्द ही इसके प्रचार-प्रसार के लिए निर्देश भी दिए. इस अवसर कैबिनेट मंत्री ने के.एम.सी. के लिए समर्पित भाव से कार्य कर रही अग्रिमाओं की जमकर तारीफ की. उन्होंने कहा कि अग्रिमाओं के बगैर के.एम.सी. को धरातल पर नहीं लाया जा सकता था. इस मौके पर मिशन निदेशक पंकज कुमार ने बताया कि वर्ष 2017 में 25 के.एम.सी. लाउंज का उद्घाटन किया था. वर्तमान में उत्तर प्रदेश में 69 के.एम.सी. लाउंज चल रहे हैं. आज के लोकार्पण के बाद अब यूपी में 170 हो गई है.

कम्युनिटी एम्पोवेर्मेंट लैब के संस्थापक डॉक्टर विश्वजीत कुमार ने बताया कि गर्भकाल से ही मां एवं शिशु के प्रथम 1000 दिवस की यात्रा बहुत महत्वपूर्ण होती है. इस यात्रा के दौरान गर्भ में पल रहे शिशु की उचित देखभाल बहुत ही आवश्यक होती है. कई रिपोर्ट्स यह साबित करती हैं कि यदि के.एम.सी. को यदि प्रभावी रूप से लागू कर दिया जाये तो नवजात शिशु मृत्युदर में 25 प्रतिशत गिरावट लाई जा सकती है. कार्यक्रम के दौरान कई जनपदों के चिकित्साधिकारियों, नर्सेज और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों हिस्सा लिया. यह लोकार्पण कार्यक्रम राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन उत्तर प्रदेश द्वारा कम्युनिटी एम्पोवेर्मेंट लैब के तकनीकी सहयोग से आयोजित किया जा रहा है.

क्या है के.एम.सी.?

कम वजन के साथ पैदा होने वाले नवजात को स्वास्थ्य रखने के लिए के.एम.सी. (कंगारू मदर केयर) एक अचूक प्रक्रिया है. इस प्रक्रिया के तहत कम वजन वाले नवजात को मां या कोई भी अपनी त्वचा से लगाकर रखता है. यह प्रक्रिया कम से कम 20 घंटे तक चलती है. इससे शिशु के वजन में स्वतः बढ़ोतरी होती है. वर्ष 2014 में भारत सरकार की ओर से इन्डियन न्यूबोर्न एक्शन प्लान में नवजात शिशु जीवन रक्षा के लिए निर्धारित की गई रणनीति में कम वजन के शिशुओं के लिए के.एम.सी. को प्रमुखता भी दी गई है.

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