लखनऊ। जापानी इंसेफलाइटिस (जेई) का अभियान 11 जून तक चलना था लेकिन रविवार अवकाश के कारण एक दिन पहले ही बंद कर दिया गया। अभियान आगे बढ़ाया जाएगा, इस बात मुख्य चिकित्साधिकारी डा. जीएस बाजपेयी इनकार करते हैं। एक से 15 वर्ष तक शत प्रतिशत बच्चों का टीकाकरण का लक्ष्य था, जिसका पूरा होना मुश्किल है, क्योंकि जिला अस्पताल से लेकर पीएचसी तक रोजाना टीकाकरण करने के निर्देश थे लेकिन शहर में अरबन हेल्थ सेन्टर पर टीकाकरण नहीं चलाया गया, जो नहीं चला।
सीतापुर रोड स्थित त्रिवेणीनगर के मारुति पार्क स्थित अरबन हेल्थ सेन्टर पर कई लोग टीकाकरण करने पहुंचे तो पता चला कि इसके लिए उनको अलीगंज स्थित शहरी सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र जाना पड़ेगा। ऐसी स्थिति में लक्ष्य शत प्रतिशत लक्ष्य पूरा कर पाना बहुत कठिन है। जनपद में कितने बच्चों को टीका लगाए गए, इस पर अधिकारियों का कहना है कि अगले सप्ताह तक सूची तैयारी होगी, तब बता पाएंगे।
हालांकि, डिस्ट्रिक टास्क फोर्स की बैठक में जेई टीकाकरण को विशेष अभियान के रूप में चलाने के निर्देश दिये गए थे। इसलिए के जनपद में लक्षित 225235 बच्चों को शत प्रतिशत जेई टीकाकरण से आच्छादन किया जाना था। वहीं मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्र में प्रथम चरण में टीकाकरण प्रारम्भ करने का आदेश दिया गया। एक गांव में एक दिन टीकाकरण किया जाना था। इसके बावजूद सीतापुर रोड से जुड़े कई गांवों में तमाम बच्चे जेई अभियान से जुड़ नहीं पाए जबकि यह एक घातक तथा अपंगता पैदा करने वाली बीमारी है जो जापानी इन्सेफ्लाइटिस वायरस द्वारा उत्पन्न होती है। मस्तिक में जाकर सूूजन तथा मस्तिष्क की कोशिकाओं को क्षति पहुंचाता है।
प्रारम्भिक अवस्था में फ्लू की तरह लक्ष्ण होते है जिसमें बुखार कंपकपी थकान सिरदर्द तथा मितली या उल्टी कन्फ्यूजन व उत्तेजना भी हो सकती है बाद में झटके आना पैरालिसिस तथा गहरी बेहोशी होती है, जिससे रोगी की मृत्यु भी हो जाती है। सरकारी आकड़ों की माने तो 243 ग्रामीण क्षेत्रों और 302 शहरी क्षेत्र में उपकेन्द्र बनाये गये थे। ग्रामीण आशा 1384, शहरी क्षेत्र 342 आशाओं और 2716 आंगनबाडी कार्यकत्रियों को लगाने की बात कही गयी।















