लखनऊ। आये दिन अस्पतालों में मरीजों का भुगतान न होने पर बंधक बनाये जाने की खबर छपती रहती है। इलाज कराने वाले मरीजों को अपने अधिकार ही नहीं मालूम है। इसके लिए केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने मरीजों के अधिकारों पर एक चार्टर जारी किया है। अगर वह चार्टर प्रभावी हो जाता है, तो अस्पताल की मुसीबत बन सकती है। इसमें भुगतान विवाद होने की सूरत में मरीज को अस्पताल में रोक कर रखने अथवा मरीज का शव परिजन को सौंपने से इनकार करना शीघ्र ही अपराध की श्रेणी में आ जाएगा।
मरीज चार्टर के मसौदे के अनुसार अस्पताल भुगतान को ले कर विवाद जैसे प्रक्रियात्मक आधार पर किसी मरीज को रोक कर नहीं रख सकता आैर उसे अस्पताल से छुट्टी देने से इनकार नहीं कर सकता। इसमें कहा गया है कि यह अस्पताल की जिम्मेदारी है कि वह अस्पताल में इलाज कराने वाले किसी मरीज को गलत तरीके से नहीं रोके अथवा उसका शव देने से इनकार नहीं करे।
संयुक्त सचिव सुधीर कुमार की ओर से जारी नोटिस के अनुसार मंत्रालय राज्य सरकारों के माध्यम से इस चार्टर को लागू कराना चाहता है। इसे राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने तैयार किया है। इस चार्टर को स्वास्थ्य मंत्रालय की वेबसाइट पर डाला गया है, आैर आमजन आैर पक्षकारों से सुझाव आैर विचार मांगे गए हैं। इस चार्टर में मरीजों अथवा उनके परिजन के अधिकारों के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई है।
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