इसमें मरीज के हस्ताक्षर ही नहीं बल्कि पूरी जानकारी दे

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लखनऊ। चिकित्सा शिक्षा मंत्री आषुतोष टण्डन ने कहा कि शोध कार्य को बढ़ावा दिया जाना चाहिए। तब ही चिकित्सा शिक्षा में सुधार किया जा सकता है। श्री टंडन शनिवार को किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय के कलाम सेंटर में आयोजित गुड क्लीनिकल प्रैक्टिस-जीसीपी एवं मेडिकल इथिक्स विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे।
मुख्य अतिथि आशुतोष टंडन ने कहा कि बीमारियों में देखा गया है कि बैक्टीरिया और वायरस बदल रहे है। ऐसे मेंं मरीजों को बेहतर इलाज के लिए शोध की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार मरीजों को उच्चस्तरीय इलाज देने के लिए संकल्पित है अौर इसमें तेजी से कार्य किया जा रहा है।

डॉ. संदीप तिवारी ने कहा कि डॉक्टर बेहतर इलाज के साथ शोध करें। नयी बीमारियां बढ़ रही हैं। इसके लिए नई दवाओं की खोज जरूरी है। शोध कार्य मानकों को पालन करने में पारदर्शिता बरतनी चाहिए। शोध कार्य में मरीज की सहमति के अलावा उसका आडियो- वीडियो भी बनाना चाहिए। बलरामपुर अस्पताल के निदेशक डॉ. राजीव लोचन ने कहा सड़क दुघर्टना में एक्सीडंेट के मरीजों का तत्काल बेहतर इलाज करना सबसे बड़ी चुनौती है। इसके लिए सभी संस्थानों को मिलकर कार्ययोजना बनानी होगी।

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केजीएमयू कुलपति डॉ. एमएलबी भट्ट ने कहा कि शोध व ड्रग ट्रॉयल के लिए कमेटी बनी हुई है। सभी मेडिकल संस्थान में इस तरह की कमेटी होनी जरूरी है। उन्होंने कहा कि शोध जरूरत के हिसाब से किया जाना चाहिए। शोध क्षेत्रीय और राष्ट्रीय जरूरतों के हिसाब से होना चाहिए। चकगजरिया स्थित कैंसर संस्थान के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. एचएस पहवा ने कहा कि जिस मरीज या व्यक्ति पर शोध किया जा रहा है। उसके हस्ताक्षर ही नहीं बल्कि उसे सर्जरी करने या शोध से होने वाले फायदे व नुकसान की जानकारी स्पष्ट रूप से देना चांिहए। ताकि उसको किसी प्रकार का भ्रम न रहे। डा. नीरजा वर्मा ने कहा कि शोध कार्य में मरीज व उसके परिजनों को पूरी जानकारी देने के साथ ही उसे जांच में निशुल्क होना चाहिए। दवाओं की मानीटर लगातार करते रहना चाहिए। शोध के सभी पैरामीटर का प्रयोग करते रहना चाहिए।

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