लखनऊ । प्रदेश के लगभग तीन करोड़ लोग किसी न किसी तरह के एलर्जी व अस्थमा की चपेट में है। चौकाने वाली बात यह है कि एलर्जी व अस्थमा की बीमारी ज्यादातर लोगों को खान-पान व रहन-सहन से बीमारी के कारण मिलती है। यह जानकारी इंडियन कॉलेज ऑफ एलर्जी अस्थमा एंड अप्लाइड इम्युनॉलॉजी के राष्ट्रीय सचिव डॉ. एबी सिंह ने दी। यह कार्यशाला इंडियन कॉलेज ऑफ एलर्जी अस्थमा एंड अप्लाइड इम्युनॉलॉजी की ओर से आयोजित की गयी है। केजीएमयू व एरा विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित कार्यशाला में देश- विदेश के वैज्ञानिक भाग लेंगे।
डा. एबी सिंह ने कहा कि अगर देखा जाए तो देश की लगभग 30 करोड़ की आबादी एलर्जी की चपेट में है। यूपी में यह आंकड़ा करीब तीन करोड़ है। उन्होंने बताया कि बचपन में खान-पान की वजह से एलर्जी होती है। करीब पांच से सात फीसदी बच्चे एलर्जी, अस्थमा व दूसरी श्वसन सम्बधी बीमारी की चपेट में है, 30 साल की उम्र के बाद घर के संसाधनों के कारण बीमारी हो रही है। काफी लोग 40 साल के बाद एलर्जी व अस्थमा के दूसरे कारण हैं।
डॉ. सूर्यकांत ने कहा कि वर्तमान परिवेश में फास्ट-फूड न सिर्फ सेहत बिगाड़ रहे हैं बल्कि एजर्ली व अस्थमा जैसी बीमारी भी बढ़ा रहे हैं। अगर देखा जाए तो पिज्जा, बर्गर, चाउमीन, कोल्ड ड्रिंक जैसे पेय पदार्थों की वजह से एलर्जी हो रही है। उन्होंने बताया कि फास्ट-फूड में ज्यादातर बासी वस्तुओं का इस्तेमाल होता है। इसके अलावा खाने-पीने की दूसरी वस्तुओं को सुरक्षित रखने के लिए कैमिकल का प्रयोग किया जाता है। ऐसी वस्तुओं को खाने से शरीर में फ्री रेडिकल्स बनते हैं, जो कि फ्री रेडिकल्स कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाते तो शरीर में सूजन आ आती है। शरीर पर चकत्ते पड़ने लगते है।
कार्यशाला के आयोजक अध्यक्ष डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने कहा कि खुजर्ली और चकत्ते को लंबे समय तक नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। खासतौर पर कुछ खाने व दूसरे वातावरण में जाने पर शरीर में खुजली, चकत्ते, छीकने व गले में खराश आदि की परेशानी हो तो उसे गंभीरता से लेना चाहिए। अगर बीमारी नियंत्रित न हो रही हो तो विशेषज्ञ डॉक्टर के परामर्श लिया जाना चाहिए।
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