लखनऊ। इन्द्रप्रस्थ अपोलो हॉस्पिटल्स को बच्चों में किडनी ट्यूमर की रोबोटिक सर्जरी पर सर्वश्रेष्ठ ऑपरेटिंग वीडियो के लिये पहला पुरस्कार मिला है। यह पुरस्कार आयोजित हुये तीन दिवसीय 13वें पीडिएट्रिक एंडोस्कोपिक सर्जन्स कॉन्फ्रेन्स पेसीकॉन 2018 में दिया गया। इसमें 50 देशों यूएस, यूके, रूस, सिंगापुर, सार्क एवं अफ्रीकी देशों से आए 250 से अधिक प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। अस्पताल के पीडिएट्रिक यूरोलोजी एवं पीडिएट्रिक सर्जरी विभाग द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम के दौरान लैप्रोस्कोपिक एवं रोबोटिक तकनीकों के माध्यम से मिनीमली इनवेसिव सर्जरी पर प्रेज़ेन्टेशन्स दी गईं। इसके अलावा इन्द्रप्रस्थ अपोलो हॉस्पिटल्स में नवजात बच्चों पर की गई 1000 कामयाब मिनीमली इनवेसिव सर्जरियों का जश्न भी मनाया गया।
इन्द्रप्रस्थ अपोलो हॉस्पिटल्स, दिल्ली को बच्चों में किडनी ट्यूमर की रोबोटिक सर्जरी पर सर्वश्रेष्ठ ऑपरेटिंग वीडियो के लिए पहला पुरस्कार दिया गया जिसमें पेट खोले बिना किडनी को सुरक्षित रखते हुए सर्जरी की गई। पेसीकॉन 2018 के 13वें संस्करण में हाईली-स्पेशलाइज़्ड एडोलसेन्ट बैरिएट्रिक सर्जरी सेगमेन्ट पर विशेष रूप से ज़ोर दिया गया। सम्मेलन में हिस्सा लेनेे वाले प्रतिभागियों को लाईव ऑपरेटिव रोबोटिक पीडिएट्रिक यूरोलोजी वर्कशॉप (वैट्टीकुट्टी फाउन्डेशन द्वारा) में शामिल होने का अवसर मिला। जहां लैप्रोस्कोपिक सर्जरी एवं रोबोटिक यूरोलोजी के 2 ओटी में लाईव ऑपरेशन किए गए।
मिनीमली इनेवेसिव पीडिएट्रिक सर्जरी के महत्व पर चर्चा करते हुए डॉ0महेन्द्र भंडारी, डायरेक्टर- रोबोटिक सर्जरी एजुकेशन एण्ड रीसर्च, वैट्टीकुट्टी यूरोलोेजी इन्सटीट्यूट एवं सीईओ-वैट्टीकुट्टी फाउन्डेशन ने कहा, ‘‘मिनीमली इनवेसिव सर्जरी छोटे बच्चों के लिए बेहद प्रासंगिक है, क्योंकि उनके शरीर का वज़न कम होता है और इस तरह की सर्जरी में खून का नुकसान होने की संभावना कम होती है। इससे मरीज़ ज़्यादा सुरक्षित रहता हे। मिनीमनी इन्वेसिव सर्जरी आज ओपन सर्जिकल तकनीकों की जगह ले रही है, ऐसे में दुनिया भर के मेडिकल स्कूल अपने सर्जनों को एमआईएस तकनीकों में प्रशिक्षण दे रहे हैं।’ हाल ही के वर्षों में इन्द्रप्रस्थ अपोलो हॉस्पिटल्स एमआईएस तकनीको के लिए अग्रणी केन्द्र के रूप में उभरा है।
अस्पताल नवजात शिशुओं में लैप्रोस्कोपिक एवं रोबोटिक सर्जरी, जीआई एंडोस्कोपी, ब्रोंकोस्कोपी, एंडेन्डो-यूरोलोजी के क्षेत्रों में अपनी विशेषज्ञता साबित कर चुका है। सम्मेलन के दौरान प्रस्तुत की गई लाईव कार्यशाला ने सर्जनों को रोबोटिक तकनीकों का अनूठा अनुभव प्रदान किया है। सम्मेलन के दौरान ऐसे मरीज़ों के परिवार भी मौजूद थे जो अस्पताल में रोबोटिक सर्जरी करवा चुकेे हैं। 8 बच्चों में इस तरह की सर्जरी की गई, इनमें से सभी को सर्जरी के 48 से 72 घण्टों के अंदर छुट्टी दे दी गई। डॉ केेतन पारिख, प्रेज़ीडेन्ट, इण्डियन एसोसिएशन ऑफ पीडिएट्रिक सर्जन्स ने इस बात पर संतोष जताया कि देश में बच्चों एवं नवजात शिशुओं की मिनीमली इनवेसिव सर्जरी अब परिपक्व रूप ले चुकी है और अभिभावक बिना किसी चिंता के सर्जरी के इस तरीके को अपना सकते हैं।
डॉ राजामणि, प्रेज़ीडेन्ट, पीडिएट्रिक एंडोस्कोपिक सर्जन्स ऑफ इण्डिया ने प्रतिनिधियों का स्वागत करते हुए कहा, ‘‘रोबोटिक्स का नया क्षेत्र मिनीमली इनवेसिव सर्जरी के लिए नए अवसर लेकर आया है, जिसके द्वारा पेट या छाती खोले बिना मुश्किल से मुश्किल सर्जरियों को सफलतापूर्वक अंजाम दिया जा सकता है। समापन पर डॉ सुजीत चौधरी, सीनियर कन्सलटेन्ट, पीडिएट्रिक यूरोलोजी एवं पीडिएट्रिक सर्जरी-इन्द्रप्रस्थ अपोलो हॉस्पिटल्स ने कहा, ‘‘इस कार्यक्रम का सफलतापूर्वक पूरा होना आधुनिक पीडिट्रिक तकनीकों में अपोलो हॉस्पिटल की विशेषज्ञता एवं अग्रणी भूमिका की पुष्टि करता है।
मिनीमली इन्वेेसिव सर्जरी, विशेष रूप से बच्चों में इस तरह की सर्जरी में मेडिकल कोलाबोरेशन बहुत अधिक मायने रखते हैं। एमआईएस तकनीक के चलते आज पीडिएट्रिक सर्जरी पहले से कहीं अधिक सुरक्षित हो गई है।’’ तीन दिवसीय सम्मेलन के दौरान अपेन्डिसाइटिस, हर्निया रिपेयर, फिस्टुला, सिस्ट, स्पाइनल मालफोर्मेशन, रीनल एनोमलीज़, ट्यूमर एवं ट्रांसप्लान्टेशन में एमआईएस तकनीकों पर कई सत्रों का आयोजन किया गया।
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