लखनऊ। वर्तमान में किडनी की बीमारी में डायलिसिस के मरीज तेजी से बढ़ रहे हैं , लेकिन होम्योपैथी से खराब किडनी वाले मरीज किसी हद तक राहत पा सकते है। दावा है कि डायलिसिस के साथ भी वह होम्योपैथी का इलाज किया जा सकता हैं, सभी नियमो का पालन करने पर डायलिसिस बंद भी हो सकती है। यह जानकारी दो दिवसीय नेशनल होम्योपैथिक कॉन्फ्रेंस में शनिवार को नैनो होम्योपैथी इंस्टीटियूट रिसर्च की डॉ लुबना ने ऐसे 250 मरीजों की केस स्टडी प्रस्तुत की, जिन्हें होम्योपैथी से ठीक करने में सफ लता मिल सकती है। कॉन्फ्रेंस में बैग्लुरु, कोलकाता, दिल्ली, फैजाबाद सहित विभिन्न जगहों से होम्योपैथिक विशेषज्ञों ने एक मत से कहा कि होम्योपैथी में जटिल रोगों का इलाज सम्भव है, परन्तु शोध करने की भी आवश्यकता है। कॉन्फ्रेंस में डॉ आनंद चतुर्वेदी को लाइफ टाइम एचीवमेंट अवार्ड से सम्मानित किया गया। साथ ही लखनऊ के डॉ अनुरुद्ध वर्मा के नाम पर भी एक अवार्ड डॉ आनंद को दिया गया।
होम्योपैथिक फ्रैटरनिटी ऑफ इंडिया के तत्वावधान में आयोजित साइंटिफिक कन्वेंशन सेंटर में शनिवार को किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो बिपिन पुरी ने बतौर मुख्य अतिथि कहा कि वर्तमान में बीमारियों के इलाज के लिए अल्टरनेटिव मेडिसिन बहुत आवश्यक है। कई क्रॉनिक बीमारियों का इलाज एलोपैथी में पूरी तरह से नहीं हो पाता है। होम्योपैथ जैसी अल्टरनेटिव मेडिसिन से उस कमी को पूरा किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि लेकिन कोई भी मेडिसिन हो, आवश्यक है कि यह एविडेंस बेस्ट हो और इसमें शोध किया जाना चाहिए।
कार्यक्रम में डॉ एसडी सिंह ने कहा कि होम्योपैथ की 1600 डिस्पेंसरी चल रही है, लेकिन इस पैथी की सबसे बड़ी कमी यह है कि इसमें जांच की व्यवस्था नहीं है। इस पैथी में लक्षण के आधार पर इलाज होता है, लेकिन वर्तमान इलाज अनुमान पर नहीं हो सकता। इसलिए इसमें जांच भी विकसित कि या जाना चाहिए।
डॉ लुबना ने बताया कि किडनी की स्थिति के अनुसार दवा देकर निष्क्रीय कोशिकाओं को एक्टिव करते हैं। उन्होंने बताया कि अगर एक किडनी में बीस प्रतिशत स्टेम सेल भी एक्टिव हो जाते हैं तो दो किडनी में 40 प्रतिशत तक क्रियाशीलता बढ़ सकती है। उन्होंने कहा कि होम्योपैथी दवाओं के साथ आहार- व्यवहार का पालन भी करना चाहिए। इस तरह के लिवर में होम्योपैथी दवा का प्रयोग करके काफी हद तक लिवर फेलियर तक की नौबत से बचा जा सकता है। होम्योपैथ में इसका इलाज पूरी तरह संभव है।
कोलकाता के नेशनल होम्योपैथ इस्टीटि¬ूट के डॉ सुभाष सिंह ने बताया कि बच्चों में आज कल किताब अध्ययन न करने की आदत सामान्य है। इस लोग अक्सर अरूचि मान लेते हैं, लेकिन होम्योपैथी यह भी एक बीमारी है। एकाग्रता की कमी होने के कारण बच्चे किताबों से दूर होते हैं। लक्षण के मुताबिक दवा देकर हम एकाग्रता को बढ़ाते है, जिससे उनकी एकाग्रता बढ़ती है। कोविड के बाद बच्चों में ये दिक्कत काफी ज्यादा बढ़ गई है। नेशनल होम्योपैथी कालेज के डा.राजकुमार ने बताया कि किडनी स्टोन, चाहे वह कितना भी बड़ा हो। उसे होम्योपैथी दवा से निकाला जा सकता है। उन्होंने बताया कि कालेज में बीमारियों पर होम्योपैथी दवाओं पर लगातार शोध होता रहता है। इसमें आईबीएस जैसी बीमारियों पर होम्योपैथी दवा कारगर है। फैजाबाद से आये डा. केपी गोस्वामी ने बताया कि चर्म रोग जैसे सोरायसिस आदि होम्योपैथी दवा पूरी तरह से सफल पायी गयी है।











