लखनऊ। सोमवार को होलिका दहन मुहूर्त सायं 6ः22 से रात 8ः49 के मध्य होगा है। मान्यताओं के अनुसार इस दिन हिरण्यकश्यप की बहन होलिका जिसे अग्नि से न जलने का वरदान प्राप्त था। वह भगवान विष्णु के परम भक्त प्रह्मलाद को लेकर अग्नि में बैठ गयी थी, लेकिन प्रह्लाद को कुछ भी नहीं हुआ। ज्योतिषाचार्य समीर झा ने बताया कि भद्रा रहित प्रदोष व्यापिनी पूर्णिमा तिथि, होलिका दहन के लिये उत्तम मानी जाती है, लेकिन भद्रा मुख में होलिका दहन कदाचित नहीं करना चाहिये। पूर्णिमा तिथि 9 मार्च को प्रातः 03ः03 से प्रारम्भ होकर 9 मार्च को रात्रि 11ः17 तक रहेगी। भद्रा 9 मार्च को दिन 12:19 बजे तक रहेगी। इस लिए होली दहन का मुहूर्त सायं 6ः22 से रात्रि 08ः49 तक करना उचित है।
रंग होली 10 मार्च मंगलवार को खेली जायेगी। उन्होंने होलिका दहन पूजा विधि के बारे में बताया कि होलिका दहन के पहले विधि पूर्वक ठंडी देवी का पूजन किया जाता है। गुलाल, अबीर, फूल, नारियल, मिष्ठान, कच्चा सूत से होलिका का पूजन किया जाता है। होलिका पूजन के बाद होलिका दहन किया जाता है। नये अनाज की बलियां और उपले होली में चढ़ाये जाते है और होलिका दहन के बाद उसमें भूना गन्ना खाया जाता है। होलिका दहन के समय गेहूँ और जौ की बालियाँ से की जाती हैं और उनके ‘होले” प्रसाद के रूप में खाए जाते हैं। दहन की लकड़ी के टुकड़े को कुछ लोग घर पर भी ले जाते है। होलिका दहन के बाद उसकी राख का तिलक करना और शरीर पर लगाना भी शुभ माना जाता है।
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