लखनऊ । हाई हील की सैंडिल पहनने वाली महिलाओं के पैरों में सूजन आ सकती हैं। ऊंची हील पहनने से वह थोड़ी लंबी दिखती है, लेकिन उन्हें इसका दुष्परिणाम भी सामने आ सकते हैं। ज्यादा देर तक हाई हील की चप्पल पहनने से पैर की नसें सूज जाती है। यदि इसमें लापरवाही बरती गई थी तो पैर काटने तक की नौबत आ सकती है। लंबे समय तक घुटने के नीचे के हिस्से में सूजन ठीक नहीं होता है। उसमें घाव ठीक नहीं हो रहा है तो संजीदा हो जाना चाहिए। यह लक्षण पैरों की नसों की बीमारी वेरीकोज हो सकती है। इस बीमारी का इलाज केजीएमयू में अब आसान हो गया है। बिना चीरा-टांके लेजर तकनीक से केजीएमयू में वेरीकोज से पीड़ित मरीजों का ऑपरेशन संभव हो गया है।
यह जानकारी गुरुवार को केजीएमयू के सर्जरी विभाग में आयोजित वैरिकोज वेन सर्जरी की लाइव वर्कशाप में दिल्ली के डा. राउल जिंदल ने दी। उन्होंने बताया कि हाईहील की चप्पल पहनने से पैरों के घुटनों से ऐड़ी व पंजे तक की नसें प्रभावित होती हैं और नसों में एक विशेष प्रकार का तनाव बढ़े लग जाता है। ऐसे में अगर लम्बे समय और प्रतिदिन हाईहील की चप्पल पहनने से वैरिकोज वेन की शिकायत हो जाती है। उन्होंने बताया कि वैरिकोज वेन टांगों से जुड़ी बीमारी है, जिसमे हमारे पैरों की नसें नीली हो जाती है और उनमें दर्द होने लग जाता है। यह सबसे अधिक उन लोगों को होता है जिनकी दिनचर्या ऐसी होती है जिसमे चलना-फिरना कम से कम होता है।
यह मोटे लोगों को भी हो सकता है जो चलने-फिरने में आलस करते हैं। साथ ही उन लोगों को भी हो सकता है जो अधिक समय बैठे रहते हैं, ऐसे में वैरीकोज वेन का इलाज केवल सर्जरी से ही संभव है। उन्होंने बताया कि अभी तक वैरीकोज वेन की सर्जरी मरीज को बेहोश कर व पैरों में लंबे चीरे लगाकर किया जाता था। जिसमें मरीज के पैरों में कई बार बीस से अधिक चीरे लगाने पड़ जाते हैं और मरीज की रिकवरी भी देर में होती है, लेकिन अब इसका इलाज लेजर से संभव हो गया है। जिसमें एक छोटे छेद से मरीज की सर्जरी की जाती है और मरीज जल्द ही स्वस्थ्य हो जाता है।















