लखनऊ। एसजीपीजीआई के डॉक्टरों ने 64 साल के मरीज की ओपेन हार्ट सर्जरी कर नया जीवन दिया है। डॉक्टरों का दावा है कि मरीज की छह बाइपास सर्जरी की गई। इन्ही के साथ ही इस मरीज की गॉल ब्लेडर की पथरी सर्जरी किया गया है। मरीज की हालत ठीक है। सीवीटीएस विभाग के प्रमुख प्रो. निर्मल गुप्ता और गैस्ट्रो सर्जन प्रो. आनंद प्रकाश ने यह सर्जरी की है। मरीज को दिल की बीमारी के साथ गॉल ब्लेडर की पथरी की दिक्कत थी। हार्ट की बीमारी से पीड़ित मऊ के निहरू राम ने प्रदेश के कई डॉक्टरों दिखाया।
काफी इलाज के बाद फायदा न होने पर वह एसजीपीजीआई पहुंचा। डॉक्टरों ने एंजियोग्राफी जांच कराकर देखा कि मरीज की छह नसों में ब्लॉकेज था। इसके अलावा मरीज के गॉल ब्लेडर में स्टोन थी। इसके बाद गेस्ट्रो सर्जरी विभाग के डॉक्टर ने भी देखा। दोनों डॉक्टरों ने मिलकर सर्जरी प्लान किया। इसके बाद मरीज की पहले बाइपास सर्जरी की गई । डॉक्टरों ने मांसपेशियों को काटकर बाइपास सर्जरी की। इसके बाद गेस्ट्रो सर्जरी विभाग के प्रो. आनंद प्रकाश ने सर्जरी कर गॉल ब्लेडर की पथरी निकाली। मरीज वार्ड में भर्ती है।
रोबोट के मुकाबले सस्ती हुई यह सर्जरी प्रो. निर्मल गुप्ता के मुताबिक यह सर्जरी सवा लाख रुपये में हो गई, जबकि यदि रोबोट के जरिए सर्जरी की जाती तो दस लाख से ज्यादा खर्च होते है। चार दर्जन से ज्यादा सर्जरी कर चुके डॉक्टर बताते हैं कि यह बहुत जटिल सर्जरी थी। पीजीआई में पहली बार ऐसा ऑपरेशन किया गया है। ऑपरेशन में करीब आठ घंटे का समय लगा। हार्ट सर्जन और गेस्ट्रो सर्जरी के डॉक्टरों की टीम ने इस जटिल ऑपरेशन को अंजाम दिया है।
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