लखनऊ । संजय गांधी पीजीआई में रेजीडेंट्स डॉक्टरों ने एम्स दिल्ली के समान भत्ते की मांग को लेकर रक्तदान कर सरकार का ध्यान आकर्षण करने का प्रयास किया। शनिवार को सत्तर रेजिडेंट डॉक्टरों ने रक्तदान किया है। संस्थान स्थित ब्लड बैंक में सुबह नौ से शाम पांच बजे तक चला।
रेजीडेट डॉक्टर्स एसोसिएशन की कोर कमेटी के अध्यक्ष डॉ. आशुतोष पाराशर, उपाध्यक्ष डॉ आकाश माथुर, संयोजक डॉ अनिल गंगवार, सचिव डॉ. अक्षय और प्रवक्ता डॉ. अजय शुक्ला ने बताया कि हमारी लड़ाई अपने जायज हक के लिए है। जब एम्स के बराबर वेतन देने की संस्तुति की गयी है तो फिर हम लोगों के साथ सौतेला व्यवहार क्यों उनका कहना है कि रेजीडेंट डॉक्टर भी अस्पताल का एक अभिन्न अंग है, इसलिए उसे अलग करके देखा जाना कहां तक उचित है।

डॉ गंगवार ने कहा कि अपने हक के लिए हम लोगों द्वारा शुरू किये गये संघर्ष की पूरी रणनीति तैयार कर ली गयी है। उन्होंने कहा कि हमारे समर्थन में किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्व विद्यालय और डॉ राम मनोहर लोहिया इंस्टीट्यूट के रेजीडेंट्स डॉक्टर भी आ गये हैं और वे लोग भी विरोध प्रदर्शन के रूप में किये जा रहे रक्तदान में भाग ले रहे हैं।
विरोध के पीछे प्रमुख कारण यह है कि है कि सैद्धांतिक रूप से सरकार द्वारा रेजीडेंट्स डॉक्टरों को न तो शैक्षणिक कर्मचारी माना है और न ही गैर शैक्षणिक क्योंकि मास्टर डिग्री और सुपर स्पेशियलिटी की डिग्री लेने के लिए रेजीडेंट्स डॉक्टरी एक जरूरी हिस्सा है और इसके लिए रेजीडेंट्स डॉक्टर की नियुक्ति तीन साल के लिए अस्थायी रूप से की जाती है। सरकार का यह भी मानना है कि चूंकि नीट द्वारा रेजीडेंटस की भर्ती की जाती है, ऐसे में सिर्फ पीजीआई में इसे लागू करना मुश्किल पड़ेगा।
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