लखनऊ। लखनऊ मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय में लगभग दस वर्ष पहले का घोटाला पकड़ में आ गया है। उस वक्त बिना योग्यता के स्वास्थ्य कार्यकर्ता आैर लैब असिस्टेंट को प्रमोशन किये जाने पर शासन ने स्वास्थ्य विभाग के तीन बाबुओं को निलम्बित कर दिया है। कई वर्षो तक चली जांच में उस वक्त के तत्कालीन मुख्य चिकित्सा अधिकारी तथा सरोजनी नगर के चिकित्सा अधीक्षक पर कार्रवाई करने की तैयारी चल रही है।
वर्ष 2007 में तत्कालीन सीएमओ के के सिंह के कार्यकाल में सरोजनी नगर पीएचसी पर एक स्वास्थ्यकार्यकर्ता को लिपिक के पद पर प्रमोशन दे दिया गया था। इसके अलावा एक लैब असिस्टेंट को लैब टेक्नीशियन के पद पर प्रमोशन दे दिया गया। कुछ वर्षो के बाद इस गलत प्रमोशन के खुलासा हुआ तो जांच बैठा दी गयी। तत्कालीन चिकित्सा अधीक्षक को भी जांच की श्रेणी में रखा गया। जांच में खुलासा हुआ कि इस प्रमोशन करने में उस वक्त सीएमओ कार्यालय में तैनात लिपिक लालजीत, विवेक व पुनीत की भागेदारी भी पायी गयी। बताया जाता है कि प्रमोशन की फाइल को मूव करने व अनुमति दिलाने में इन तीनों की भूमिका महत्वपूर्ण थी।
बताया जाता है कि तत्कालीन सीएमओ की अनुमति से यह दोनों प्रमोशन किये गये। अब डा. केके सिंह सेवा निवृत्त हो चुके है आैर बताया जाता है कि प्रमोशन के कागजों में हस्ताक्षर न होने का दावा किया है। फिलहाल जांच कमेटी ने रिपोर्ट के आधार पर तीन बाबुओं को निलम्बित कर दिया है। सीएमओ डा. जी एस बाजपेयी ने बताया कि तीनों बाबु उनके तहत ही तैनात थे। निर्देश का तत्काल पालन किया गया है। बताया जाता है कि अब उस वक्त के सीएमओ व सरोजनी नगर के तत्कालीन चिकित्सा अधीक्षक पर कार्रवाई करने की तैयारी चल रही है।















