घायल को नहीं मिला ट्रामा टू में कारगर उपचार

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लखनऊ । पीजीआई के एक लैब टेक्नीशियन को चोट लगने के बाद भी बेहतर उपचार मिलने में काफी समय लग गया। राजधानी में एक रोड एक्सीडेंट में शिकार रिजवान को आठ घंटे बाद सही इलाज मिला। वह भी निजि अस्पताल में है। यदि यही गंभीर एक्सीडेंट होता तो इतने देर में जान चली जाती लेकिन गनीमत यह थी सिर के अंदर हल्की चोट थी। तेलीबाग निवासी 26 वर्षीय रिजवान मोटरसाइकिल से मां के साथ नबाबगंज से आ रहा था कि अचानक मोटरसाइिकल पंचर हो गयी। बैलेन्स बिगडा मां और रिजवान दोने गिर पडे। मां के केवल घुटने में चोट आयी लेकिन हेलमेट पहनने के बाद भी रिजवान के सिर में चोट आयी और वह बेहोश हो गया।

मां ने फोन पर घर वालों को सूचना दी इसी बीच मां ने टेम्पों से नबाबगंज सीएचसी लें गयी वहां पर ड्रेसिंग कर तुरंत लखनऊ के लिए रिफर कर दिया लिखा रिफर हायर सेंटर फार मैनजमेंज अब कैसे रिजवान को लखनऊ लाया जाए इसके लिए एम्बुलेंस तक सीएचसी पर नहीं मिला। घर वाले टेप्पो में लेकर पीजीआई आए क्योंकि रिजवान पीजीआई में संविदा पर लैब टेक्नीशियन है। करीब चार बजे एक्सीडेंट के शिकार रिवजान को 8 बजे के करीब लेकर पीजीआई इमरजेंसी मेंं आए। इमरजेंसी में ईएमओ ने देखा कहा कि यहां पर कुछ नहीं हो पाएगा क्योंकि हम लोग एक्सीडेंट के मामले नहीं लेते है। ट्रामा टू ले जाओ। घर वाले ट्रामा टू ले गए।

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वहां पर पहुंचते ही ड्यूटी पर तैनात डा. शालनी ने कहा कि सिर में चोट है हमारे यहां कोई न्यूरोलाजिस्ट या सर्जन नहीं है इस लिए समय बेकार करने का कोई मतलब है ट्रामा सेंटर मेडिकल कालेज ले जाए। इस प्रक्रिया में 9:30 बज गये । घर वाले परेशान क्या करे इसी बीच किसी ने किसी निजि डाक्टर से संपर्क किया। डाक्टर ने कहा कि आलमबाग स्थित एक निजि डांट केंद्र पर लाओ वहां पहले सीटी स्कैन कराएं। 108 एंबूलेंस ने निजी सेंटर पर जाने से मना कर दिया घर वाले रिजवान को किसी तरह मोटरसाइिकल पर बीच में बैठा कर निजी केंद्र ले गए वहां पर सीटी स्कैन हुआ।

जांच में 25 मिनट भी नहीं लगा। डाक्टर साहब ने सीटी स्कैन रिपोर्ट देखी राहत की सांस ली कहा कि उरठिया स्थित निजी अस्पताल में ले जाकर भर्ती कर दे हल्की परेशानी है ठीक हो जाएगी। रात में 11 बजे रिजवान को उस निजि अस्पताल में भर्ती कराया गया तब जाकर परिवार और साथ वाले तमाम सहयोगियों ने राहत की सांस ली।

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