लखनऊ। रेलवे में काम कर रहे लाखों कर्मियों आैर उनके परिवार एक गुड न्यूज यह है कि अब गम्भीर बीमारियों के इलाज कराने के लिए रेलवे बोर्ड के चेयरमैन अथवा महाप्रबंधकों के दिल्ली परिक्रमा नहीं करनी होगी। रेलवे बोर्ड ने जटिल व गंभीर बीमारी के मरीजों को सुपर स्पेशलिटी अस्पतालों में रिफर करने आैर सुपर स्पेशलिटी अस्पतालों को सूचीबद्ध करने का अधिकार मंडल के सभी डीआरएम को दिया है। आल इंडिया रेलवे मेन्स फेडरेशन (एआईआरएफ) लम्बे समय से इस मांग को उठा रहा था।
रेलवे बोर्ड ने कर्मचारियों आैर उनके डिबेन्डेंट परिवारवालों के इलाज को गम्भीरता से लेते हुए सभी महाप्रबंधकों को आदेश दिया है कि अब वे किसी भी कर्मचारी को सुपर स्पेशलिटी अस्पतालों में रिफर नहीं करें। यह कार्य अब रेलवे के डीआरएम करेंगे।
इस सम्बन्ध में जानकारी देते हुए आल इंडिया रेलवे मेन्स फेडरेशन (एआईआरएफ) के महामंत्री शिवगोपाल मिश्र ने बताया कि संगठन ने रेल कर्मियों के इलाज को लेकर कई बार रेलमंत्रालय आैर बोर्ड में प्रयास कर रहा था। इस बारे में कई बार अधिकारियों के साथ बैठक हुई आैर पत्र व्यवहार चला। इस समस्या को पुरजोर तरीके से उठाया गया था। उनका कहना है कि गम्भीर बीमारी से पीड़ित रेलकर्मियों को बेहतर इलाज के लिए बड़े अस्पताल में रिफर करना काफी मुश्किल हो रहा था। महाप्रबंधकों के महीनों फाइल लटका कर रखा जाता था। जिससे रेलकर्मियों की मौत तक हो जाती थी।
समस्या की गम्भीरता को देखते हुए मंत्रालय आैर बोर्ड संज्ञान में लेते हुए सभी रेलजोन महाप्रबंधकों से रिफर अधिकार को समाप्त कर यह अधिकार डीआरएम को दे दिया गया। बोर्ड ने रेलवे 64 रेलप्रबंधकों को अधिकार देते हुए रेलकर्मियों को यह राहत प्रदान की है। जीएम के पावर में कटौती कर बोर्ड ने रेलकर्मियों के हित में बेहतर आदेश दिया है। साथ ही सभी मंडलों के डीआरएम को यह भी अधिकार दिया गया है कि वह अपने मंडल में विशेषज्ञ अस्पताल रेलकर्मियों में खुशी की लहर है।