लखनऊ। सीएम के क्षेत्र से किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय के ट्रॉमा सेंटर रेफर किये गए मरीज को दलाल एम्बुलेंस चालक उसे निराला नगर स्थित निजी हास्पिटल एंड ट्रॉमा सेंटर इलाज के लिए छोड आए। करीब छह दिन तक मरीज अस्पताल में भर्ती रहने के बाद हालत बिगड़ने पर उसे ट्रॉमा सेंटर रेफर किया। जहां पर डॉक्टरों ने परीक्षण करके मृत घोषित कर दिया। पीड़ित परिवार का आरोप है कि निजी अस्पताल ने इलाज के नाम पर मोटी रकम ले लिया गया। पीड़ित परिवार ने मामले की शिकायत सीएम से की है।
बताते चले कि संतकबीरनगर का रहने वाले अरविंद का बेटा मनीष कुमार (25) दीवाली से पहले सड़क हादसे में ज मी हो गया था। तीमारदारों ने उसे गोरखपुर मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया था। जहां हालत गंभीर होने पर डॉक्टरों ने उसे एंबुलेंस से केजीएमयू ट्रॉमा सेंटर भेजा था। मरीज केजीएमयू के ट्रामा सेंटर पहुंचने की बजाय निराला नगर स्थित निजी हास्पिटल एंड ट्रॉमा सेंटर में मरीज को भर्ती करा दिया। मरीज की हालत नाजुक बताकर निजी अस्पताल के डॉक्टरों ने उसे वेंटीलेटर यूनिट पर भर्ती कर लिया आैर करीब तीन-चार दिन भर्ती रहने बाद मरीज की हालत में कोई सुधार न हुआ। परिजनों का आरोप है कि इलाज के नाम पर प्रतिदिन लगभग 30-35 हजार का बिल थमाकर करीब ढाई लाख रुपए वसूल लिए गए। तीमारदारों की मोटी रकम इलाज में खर्च हो गई।
इसके बाद भी लापरवाही बरती गयी। उनका आरोप है कि ज्यादा हालत बिगड़ने पर मरीज को केजीएमयू के ट्रॉमा सेंटर भेज दिया। जहां पहुंचने पर डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। वहीं मरीज को ट्रॉमा ले जाने से पहले अस्पताल प्रबंधन करीब 86 हजार रुपए बिल बकाया होने की बात कहकर मरीज को नहीं ले जाने दे रहे थे। परिजनों का कहना है कि निजी अस्पताल की शिकायत सीएम को भेज कर कार्रवाई की मांग किया है। उधर हास्पिटल प्रबंधन का कहना है कि तीमारदारों के आरोप गलत है। मरीज की हालत काफी नाजुक थी। उसे वेंटीलेटर पर रखा गया था। तीमारदारों से किसी तरह की वसूली नहीं की गई।
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