ड्रग एंड कॉस्मेटिक अधिनियम में संशोधन से देश के फार्मासिस्ट आक्रोशित

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लखनऊ। डिप्लोमा फार्मासिस्ट एसोसिएशन उत्तर प्रदेश ने केंद्र सरकार द्वारा ड्रग एंड कॉस्मेटिक अधिनियम में किए गए संशोधन पर आक्रोश प्रकट किया है। सभी ने एक मत से सरकार से इस संशोधन को वापिस लेने की मांग की है। इसके लिए केन्द्र सरकार को पत्र भी भेजा गया है। एसोसिएशन के महामंत्री श्रवण सचान ने कि केंद्र सरकार ने ड्रग एंड कॉस्मेटिक अधिनियम 1940 नियम 1945 की अनुसूची के शैडयूल ( के) में संशोधन किया है। इस संशोधन से डाक्टरों की सलाह पर लिखी जाने वाली दवाओं को देने का अधिकार जो अभी तक सिर्फ फार्मासिस्ट को था। उसकी अनिवार्यता समाप्त कर दी गयी है।

महामंत्री ने कहा है कि अधिनियम में संशोधन के बाद अब डॉक्टर द्वारा पर्ची पर लिखी गई दवाई को आशा वर्कर, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, नर्स और कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर भी दे सकेंगे, जबकि फार्मेसी एक्ट के तहत डॉक्टर द्वारा लिखी गई दवाई सिर्फ फार्मासिस्ट ही दे सकते हैं। यदि कोई दूसरा दवा देता है तो इसे दंडनीय अपराध माना जाता है, जिसमें एक हजार रुपये का जुर्माना या तीन महीने का कारावास अथवा दोनों का प्रविधान है।

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सभी का एक मत से कहना है कि इस संशोधन से न सिर्फ फार्मासिस्ट वर्ग के साथ खिलवाड़ हो रहा है, बल्कि आम जनता भी परेशान हो सकती है। इन्होंने केंद्र सरकार से इस संशोधन को तत्काल वापस लेने की मांग की गयी है।
प्रान्तीय कोषाध्यक्ष रजत यादव ने बताया कि इस गंभीर विषय पर वे पूरे देश के विभिन्न फार्मासिस्ट एसोसिएश के पदाधिकारी आपस में एक दूसरे से सम्पर्क कर रहे है। यदि केन्द्र सरकार इस संसोधन को वापस नहीं लेती है तो जल्द ही एक देशव्यापी आंदोलन देश के विभिन्न फार्मासिस्ट एसोसिएशन मिल कर करेगी।

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