लखनऊ। दिल की धड़कन ने दो बार साथ छोड़ा, लेकिन भगवान कहे जाने वाले डाक्टरों ने सीपीआर करके धड़कनों को वापस ला दिया। यह सब किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (केजीएमयू) के पल्मोनरी एण्ड क्रिटिकल केयर मेडिसिन विभाग में डा. वेद प्रकाश की देखरेख में इलाज कर रहे गंभीर मरीज के साथ हुआ। इलाज के दौरान वह मरीज 37 दिन वेंटिलेटर रहा। अब हालत में सुधार होने के बाद मरीज को छुट्टी दी गयी। फिलहाल, अभी मरीज को आक्सीजन की जरूरत पड़ रही है लेकिन कुछ दिनों उपचार के बाद मरीज सामान्य जीवन व्यतीत करेगा।
आजमगढ़ के कोलघाट के निवासी एवं पेशे से अधिवक्ता बलिहारी यादव (71) को 23 जनवरी को अचानक चक्कर आया। परिजनों ने स्थानीय निजी अस्पताल में जांच करायी तो पता चला कि ब्लड प्रेशर लो निकला। इलाज चला लेकिन कोई खास फायदा नहीं हुआ, 29 जनवरी को वह कोमा में चले गए। स्थानीय डाक्टरों ने अपने हाथ खड़े कर दिये अौर केजीमएमयू रेफर कर दिया। रात नौ बजे मरीज को ट्रामा सेन्टर में एडमिट कराया गया, जहां मरीज की जांच में दिमागी बुखार, निमोनिया सहित कई बीमारियों की पुष्टि की गयी। ऐसी स्थिति में कोमा में गए मरीजों को पल्मोनरी एण्ड क्रिटिकल केयर मेडिसिन में वेंटिलेटर सपोर्ट दिया गया। इस दौरान सात फरवरी आैर 18 फरवरी मरीज की हालत आैर गंभीर हुई आैर ह्मदय बंद हो गयी।
ऐसी हालत में डाक्टरों ने मरीज को सीपीआर देकर फिर से धकड़ने वापस लाने में सफलता पायी। इसके अलावा फेफड़े में क्राटिंग को निकालने में सफलता मिली। मरीज के उपचार में डा. वेद प्रकाश ने बताया कि मरीज कोमा में था, इसकी जान बचाना बेहद चुनौती पूर्ण कार्य था। उनके साथ आरआईसीयू टीम सीनियर रेजीडेंट डा. लक्ष्मी, डा. अंकित कुमार, डा. सुलक्षना गौतम, डा. अभिषेक, डा. अहबाब, डा. कैफी, डा. अल्पिका शुक्ला, डा. विकास गुप्ता, डा. शैलेंद्र कुमार सिंह, डा. आकाश सिरोही, डा. प्रियंका त्रिपाठी, डा. संतोष कुमार शर्मा और अन्य पैरामेडिकल स्टाफ ने मरीज की जान बचाने का अथक प्रयास किया गया।
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