दवा तो मिली नहीं, सब नियम बताते रहे

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लखनऊ । केजीएमयू व बलरामपुर अस्पताल के चक्कर काटने के बाद भी टीबी मरीज को इलाज नहीं मिल पा रहा है। मरीज के इलाज में नियमों का बहाना बता मरीज को पहले किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय से फिर बलरामपुर अस्पताल से लौटा दिया गया। सोमवार को एक बार फिर लाचार मां बीमार बेटे को लेकर बलरामपुर अस्पताल पहुंची, तो एक बार फिर उसे नियमों का हवाला देते हुए घर के निकटतम डॉट सेंटर जाने के लिए कहा गया। मजबूर मां अपना दुखड़ा रोने अस्पताल प्रशासनिक अधिकारियों के पास पहुंची तो वहां पर नियमो बता कर वापस कर दिया गया।

राजधानी के लाटुस रोड स्थित सरयू प्रसाद हाता निवासी कृष्णा यादव ( 18) को दिल में छेद है, जिसका इलाज केजीएमयू के लॉरी से बीते दो सालों से चल रहा है। वर्ष 2017 में लॉरी के डाक्टरों ने सर्जरी कराने के लिए कहा था, परन्तु आर्थिक संकट होने के कारण सर्जरी रोकना पड़ा। लगभग एक महीना पहले रुपयों की व्यवस्था कर परिजन ऑपरेशन के लिए लॉरी के डाक्टरों को दिखाया, जिसके बाद ऑपरेशन के लिए तारीख दे दी गयी। इस बीच आवश्यक जांचे कराने को कहा गया, जिसमें टीबी की पुष्टि हुयी। मरीज की मां सावित्री देवी का कहना है कि डाक्टरों ने पहले टीबी का इलाज कराने की सलाह दी आैर फिर सर्जरी कराने का परामर्श दिया।

इस पर सावित्री देवी ने बताया कि पहले केजीएमयू के टीबी विभाग में गये। वहां पर से बलरामपुर अस्पताल भेज दिया गया। सात मई को जब बलरामपुर अस्पताल इलाज के लिए गये, तो वहां पर पूरे दिन भटकते रहे लेकिन दवा नहीं मिल पायी। शनिवार को एक बार फिर दवा की आस लिये मरीज बलरामपुर अस्पताल पहुंचा, तो नियम बताते हुए उन्हें घर के निकट ही डॉट सेंटर पर जाकर टीबी की दवा लेने के लिए कहा गया।

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