कोविड-19 में किडनी मरीजों में पेरिटोनियल डायलिसिस है कारगर

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लखनऊ। कोविड-19 के लॉकडाउन में गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए लोगों को दिक्कतों का सामना कर पड़ रहा है। खासकर हीमोडायलिसिस करवाने वाले मरीजों के लिए परेशानियां ज्यादा हैं। इंडियन कौंसिल फॉर मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) ने हाल ही में स्पष्ट किया है कि किडनी की बीमारियों वाले मरीजों को कोरोना वायरस से अधिक खतरा है। उन्हें औरों की तरह या उनसे ज्यादा नोवल कोरोना वायरस से संक्रमण का खतरा है। ऐसे में घर पर रहते हुए पेरिटोनियल डायलिसिस (पीडी) लोगों की मदद के लिये सामने आ रहा है।

पीजीआई के नेफ्रोलॉजी डिपार्टमेंट प्रमुख डॉ. अमित गुप्ता का कहना है किडनी की बीमारियों से जूझ रहे मरीजों को रोजाना की साफ-सफाई का भरपूर ध्यान रखना चाहिये। डायलिसिस दो तरह के होते हैं- एक है हीमोडायलिसिस और दूसरा है पेरिटोनियल डायलिसिस। हीमोडायलिसिस में एक हफ्ते में दो से तीन बार अस्पताल जाना पड़ता है और डायलिसिस मशीनों को दूसरे मरीजों के साथ साझा करना पड़ता है। वहीं, दूसरी तरफ पेरिटोनियल डायलिसिस (पीडी) घर में ही किया जाता है, जहां मरीज पूरी तरह से आइसोलेशन में होता है और वे दूसरे मरीजों के संपर्क में आने से बचे रहते हैं। इसलिये, घर पर की जाने वाली डायलिसिस जैसे पेरिटोनियल डायलिसिस ऐसे समय में ईएसआरडी के मरीजों के लिये सबसे बेहतर विकल्प है, परन्तु घर पर की जाने वाली इस तरह की डायलिसिस में उचित प्रशिक्षण की जरूरत होती है। पारंपरिक हीमोडायलिसिस (एचडी) के उलट, मरीज सुविधा के लिये पीडी अपना रहे हैं।

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