छापे के बाद बीएनके व मेडिसिन ब्लड बैंक का संचालन रोका

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लखनऊ। फूड सेफ्टी एंड ड्रग्स एडमिनिस्ट्रेशन ने मिलावटी ब्लड के निर्माण में बीएनके ब्लड बैंक व मेडिसिन ब्लड बैंक के तार जुड़ा होने के बाद यहां पर छाप मारा। छापे में एफएसडीए की टीम को इन दोनों ब्लड बैंकों में काफी अनियमितता मिली है। इसके बाद ब्लड बैंक का संचालन रोक दिया गया है। एसटीएफ को मिलावटी ब्लड को दो अलग- अलग घरों में बनाने का काम करने को पकड़ने के बाद बीएनके ब्लड बैंक व मेडिसिन ब्लड बैंक से कुछ तार जुड़े मिले थे। इसके बाद एफएसडीए के अधिकारियों ने छापा मारने के लिए दोनों ब्लड बैंकों में टीम भेजी। यहां पर छापा मारने के बाद दोनों ब्लड बैंक में काफी अनियमितताएं मिली। ब्लड के आपूर्ति करने वाले फार्म को ठीक तरह से नहीं भरा गया था। इस कारण पूरा विवरण सही मिला। इसके अलावा सबसे बड़ी गड़बड़ी ब्लड को स्टोरेज करने में तकनीकी दिक्कत दिखायी दी। बताया जाता है कि इसी प्रकार प्लाज्मा, प्लेटलेट्स की आपूर्ति में कई गड़बड़ी मिली।

इसके आधार पर छापा मारने वाली टीम ने दोनों ब्लड बैंकों के संचालन को ठप करने के निर्देश दे दिये। अगले आदेश व समस्याओं का निराकरण नहीं होने तक ब्लड बैंकों संचालन ठप रहेगा। एफएसडीए के अधिकारियों का दावा है कि इन दोनों ब्लड बैंकों के ब्लड बैग की गणना की गयी। वर्ष 20 16 में सआदतगंज के घर में चलते मिले ब्लड बैंक घर में चलता मिला था, तब भी मेडिसिन ब्लड बैंक से तार जुड़े मिले थे। हालांकि कुछ दिन तक चली जांच के बाद मेडिसिन ब्लड बैंक को हरी झंडी दे दी गयी थी।

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ब्लड बैक से बैग लेना है कठिन

ब्लड बैंकों ब्लड में प्रयोग किये जाने वाले ब्लड बैग को निकालना आसान नहीं होता है। कम्पनी द्वारा ब्लड बैग की आपूर्ति के बाद इनकी गणना करके रजिस्टर भी बनाया जाता है। जिसकी जांच में जानकारी भी देनी पड़ती है। परन्तु ब्लड बैंको से ब्लड निकल कर मिलावटी ब्लड के लिए प्रयोग होते रहे है आैर ब्लड बैंक संचालक को नहीं पता चला। यह भी जांच का विषय बन गया है।

वर्ष 2016 में घर में बनाये जा रहे मिलावटी ब्लड के दौरान भी ब्लड बैग कहां से मिलते है। इसका मुद्दा उठा था। ब्लड बैग में पड़े नम्बर के आधार पर कम्पनी व किस ब्लड बैंक को आपूर्ति हो रही है। इसकी जानकारी भी जांच की गयी थी। इसके बाद भी कौन ब्लड बैंक ब्लड बैग दे रहा है। यह खुलासा नही किया गया आैर संदिग्ध ब्लड बैंक को हरी झंडी देते हुए। उसे ब्लड बैंक संचालन करने की अनुमति भी दे दी गयी थी। इस बार भी मिलावटी ब्लड बनाने के लिए ब्लड बैग की आपूर्ति को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है।

पीआरबीसी समझ कर खरीद रहे थे मिलावटी खून

मिलावटी ब्लड को पीआरबीसी ( पैक्ड रेड ब्लड सेल) कह कर बेचा जा रहा था। पकड़े गये अभियुक्तों ने कबूला कि वह लोग ब्लड में नार्मल स्लाइन का मिला देते थे। इससे ब्लड पतला हो जाता था आैर दो यूनिट ब्लड बन जाता था। यह काफी हद तक पीआरबीसी की तरह दिखने लगता था। यही नहीं एसटीएफ व एफएसडीए को छापे में एचआईवी किट, एचबीएस एजी किट, एचसीवी किट, मलेरिया एसडी किट के अलावा अन्य किट भी बरामद हुई है। इन किट की बरामदगी को अभी तक एफएसडीए टीम समझ नहीं पायी है कि जब यह लोग ब्लड की जांच ही नहीं करते थे तो इन खरीद कर रखा क्यों गया था।

नकली ब्लड बैंकों के लेबल होने के कारण जल्दीबाजी में लोग जांच पड़ताल भी नहीं करते थे। पीआबीसी को लोग आसानी से खरीद लेते थे। पकड़े गये लोगों ने कबूला ज्यादातर लोग बिना रक्तदान के ब्लड लेने वोले तीमारदारों को तीन हजार तक आसानी से खरीद लेते थे। इनके दलाल केजीएमयू से लेकर अन्य सरकारी अस्पतालों के ब्लड बैंकों तक सक्रिय रहते थे। यह लोग फ्रेस फ्रोजन प्लाज्मा का लेवल भी बरामद किया गया है। यह लोग प्लाज्मा भी बेच रहे थे।

मिलावटी ब्लड से फायदा नही फैल रहा था संक्रमण

किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय की ब्लड ट्रांसफ्यूजन विभाग व ब्लड बैंक प्रभारी डा. तूलिका चंद्रा की माने तो नार्मल स्लाइन मिला हुआ ब्लड मरीज को चढ़ाने के बाद तत्काल तो रिएक्शन नहीं करता है, लेकिन यह शरीर में संक्रमण पैदा कर सकता है। यह संक्रमण किसी भी प्रकार का हो सकता है।

रक्तदाता से ब्लड लेने के बाद एचआईवी, हेपेटाइटिस बी, सी, वीडीआरएल, मलेरिया पैरासाइट आदि की जांच की जाती है। लेकिन घर में बनाये जा रहे मिलावटी ब्लड की किसी प्रकार की जांच नही होने से मरीज को मिलावटी ब्लड चढ़ने के बाद प्लेटलेट्स तो नहीं बढ़ती थी, उल्टे उसे विभिन्न प्रकार के संक्रमण होने की आशंका ज्यादा बन जाती थी। यही नहीं स्लाइन वाटर मिलाये जाने से ब्लड का वाल्यूम भी बढ़ने से आरबीसी टूट भी सकती है। जिससे मरीज को दिक्कत हो सकती थी।

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