लखनऊ। अगर एसिडिटी, भूख कम व पीलिया के लक्षण के साथ ही पेट में दर्द भी बना रहे तो विशेषज्ञ डाक्टर से जांच कर परामर्श लेना चाहिए। यह लक्षण गॉल ब्लैडर कैंसर के हो सकते है। यह कैंसर उत्तर भारत में तेजी से बढ़ रहा है। यह कैंसर महिलाओं में सबसे ज्यादा पाया गया है। कैंसर के कारणों के सटीक कारणों को अभी तक वैज्ञानिक डाक्टर व शोध कर्ता तक नहीं बता सके हैं। उनका मानना है कि लम्बे शोध के बाद ही इसके होने के कारणों का पता चल सकेगा। फिलहाल गॉल ब्लैडर कैंसर पर जानकारी के लिए शनिवार को गोमती नगर के डा. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान में आयोजित गॉल ब्लैडर की राष्ट्रीय कार्यशाला में वैज्ञानिक व डाक्टर आ रहे है। यह जानकारी पत्रकार वार्ता में संस्थान के डा. आकाश अग्रवाल ने दी।
फ्लोराइड, केमिकल की मात्रा अधिक होने के कारण यह कैंसर होता बनती है –
उन्होंने बताया कि अक्सर लोग गैस, एसिडिटी को नजर अंदाज करके लम्बे समय तक करते है आैर विभिन्न प्रकार की दवाओं का सेवन किया करते है। उन्होंने बताया कि अगर यह लक्षण बना रहे आैर पीलिया के भी लक्षण नजर आये तो तत्काल विशेषज्ञ डाक्टर से सम्पर्क करना चाहिए। उन्होंने बताया कि अभी तक यह कहा जाता है कि उत्तर भारत में नदियों के किनारे बसे शहरों में फ्लोराइड, केमिकल की मात्रा अधिक होने के कारण यह कैंसर होता बनती है। डा. अग्रवाल ने बताया कि यह कैंसर महिलाओं में सबसे ज्यादा होता है। आकंड़ों को देखा जाए तो कम उम्र में भी गॉल ब्लैडर कैंसर हो रहा है।
डा. अग्रवाल ने बताया कि गॉल ब्लैडर स्टोने होने के बाद कैंसर होने की आशंका बतायी जाती थी, पर यह गलत है कैंसर दोनों परिस्थितियों में हो सकता है। इसकी सर्जरी में लिफ्फ नोड व लिवर का कुछ भाग निकाल दिया जाता है। इसके बाद बीमारी के स्टेज के आधार पर रेडियोथेरपी या कीमोथेरेपी तय की जाती है।















