लखनऊ। गर्मी व उमस के कारण प्रमुख सरकारी अस्पतालों में बुखार व डायरिया के मरीजों की संख्या बढ़ गयी है। इन अस्पताल की इमरजेंसी में बुधवार को कई मरीज भर्ती कराये गये, जिनकी बुखार व उल्टी-दस्त (डायरिया) पीड़ितों की संख्या काफी बढ़ी है। बलरामपुर अस्पताल व डा. श्यामा प्रसाद मुखर्जी (सिविल) अस्पताल के बाल रोग विभाग के वार्ड में मरीजों की भर्ती संख्या हाउसपुल होने की कगार पर पहुंच गए हैं। कामोबेश यही हाल गोमतीनगर स्थित डा. राम मनोहर लोहिया संयुक्त चिकित्सालय का भी है। बच्चे नहीं बड़े भी डायरिया का शिकार हुए हैं। फिलहाल चिकित्सक इसे मौसमी बीमारी मान रहे हैं। उन्होंने मरीजों को खानपान तथा रहन-सहन पर ध्यान देने की सलाह दी है।
बलरामपुर अस्पताल की ओपीडी आये माल के केशनु (55), एनके पाण्डेय (64), खदरा की मीना (5) आैर सआदतगंज के मोहम्मद रफीक (65) को बुखार के साथ डायरिया से पीड़ित थे। इनके साथ आए तीमारदार कहते हैं कि दवा खाने के कुछ देर बाद बुखार उतरता लेकिन फिर से चढ़ता है। वार्ड नम्बर तीन बाल रोग विभाग में भर्ती कई बच्चों के खून के नमने पैथलॉजी भेजे गये हैं, ताकि पता चल सके कि आखिर बुखार कौन सा है। परिजन रिपोर्ट का इंतजार कर रहे हैं, जबकि इससे पहले एडमिट हुए बच्चों की रिपोर्ट में ज्यादातर मामलों में वायरल बुखार की पुष्टि हुई है। फिलहाल, चिकित्सक भी वायरल बुखार मान रहे हैं।
डा. श्यामा प्रसाद मुखर्जी (सिविल) अस्पताल के वातानुकूलित बाल रोग विभाग में डायरिया वार्ड के नाम से आरक्षित वार्ड नम्बर चार में बिस्तर खाली नहीं है। एक बच्चे के पिता बताते हैं कि उनके बेटे को उल्टी-दस्त के साथ बुखार चढ़ा है। जांच में वायरल फीवर निकला है। अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डा. आशुतोष दुबे ने बताया कि एकाएक गर्मी व ठण्डा होना स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक है। बलरामपुर अस्पताल के फिजीशियन चिकित्सक डा. आरएन मिश्र ने बताया कि यदि बारिश में भीग जायें तो साफ पानी स्नान करें। काफी देर गीले कपड़े न पहने रहें। स्वास्थ्य बिगड़ने पर लापरवाही न करें। कुशल चिकित्सक से तत्काल परामर्श लें। वायरल फीवर ठीक में पांच से सात दिन भी लग सकते हैं। डा. राम मनोहर लोहिया संयुक्त चिकित्सालय में तीन फिजीशियन डाक्टरों की ओपीडी में बुखार, डायरिया आैर डी-हाईड्रेशन से परेशान दर्जनों मरीज आए।















