डेस्क। आयुष डाक्टरों को एलोपैथ प्रैक्टिस करने के लिए राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग विधेयक में ब्रिज कोर्स का प्रावधान करने की तैयारी कर रहा है। उनका दावा है कि इससे देश में डाक्टरों की ”जबरदस्त कमी”” को पाटने के लिए किया गया है ।
बताते चले कि स्वास्थ्य मंत्रालय ने अपनी वेबसाइट पर विधेयक के बारे में सवाल करने के लिए अलग से खंड बनाया है। इस कदम का मकसद विभिन्न प्रावधानों को लेकर क्लीनिकल मतभेद का निदान करना है।
विधेयक को संसद की स्थायी समिति को भेजा गया है, क्योंकि डाक्टरी पेशे से जुडे लोगों ने विधेयक के विभिन्न प्रावधानों को लेकर तीखा विरोध किया था। मंत्रालय ने यह भी आश्वस्त किया है कि ब्रिज कोर्स अवैज्ञानिक आैर खतरनाक नहीं होगा। ब्रिाज कोर्स के अवैज्ञानिक आैर खतरनाक होने के सवाल पर मंत्रालय का कहना है कि एनएमसी में एलोपैथी डॉक्टरों का प्रभुत्व रहेगा। अगर सही विचार-विमर्श के बाद अगर वे सर्वसम्मति से ब्रिज कोर्स को मंजूरी देते हैं तो ऐसा मानने का कोई कारण नहीं है कि यह अवैज्ञानिक आैर खतरनाक होगा।
मंत्रालय ने कहा कि इस पाठ्यक्रम को इस तरह से बनाया जाएगा कि यह अन्य डॉक्टरों को जिम्मेदारी के साथ सीमित दवाइयां देने में ही समक्ष बनाए। इसने कहा कि एनएमसी विधेयक का मकसद स्वास्थ्य देखभाल कर्मियों की कमी को पाटना है। इसके लिए प्रशिक्षित आयुष डॉक्टरों को ब्रिज कोर्स के जरिए एलोपैथिक चिकित्सा पद्धति की निवारक आैर उसे बढावा देने वाले उनके कौशल को निखारना है। देश में शहरों में रहने वाले डॉक्टर ग्रामीण इलाकों में काम नहीं करना चाहते हैं। जहां पर यह काफी प्रभावी होगा।
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