लखनऊ। बलरामपुर अस्पताल में डॉक्टर के फर्जी हस्ताक्षर बनाकर ब्लड की दलाली का भंड़ाफोड़ हुआ है। दलाल डॉक्टर के फार्म पर फर्जी दस्तखत बनाकर फिर उस फार्म को ब्लड बैंक में बिना डोनर ब्लड लेने की कोशिश करता था। शक होने पर कर्मचारियों ने दलाल को पकड़ लिया आैर हस्ताक्षण के आधार पर डॉक्टर से बात करने पर पूरे प्रकरण का खुलासा हो गया। इसके बाद बलरामपुर अस्पताल प्रशासन ने दलाल को पुलिस के हवाले कर रिपोर्ट दर्ज करा दी है। अस्पताल प्रशासन ने अपने स्तर जांच भी शुरू कर दी है। इसके अलावा अन्य सरकारी अस्पतालों के ब्लड बैंक को सर्तक कर दिया गया कि फार्म पर हस्ताक्षर का मिलान करके पूरी पुष्टि के बाद ही ब्लड यूनिट दे।
शुक्रवार देर रात न्यू हैदराबाद कॉलोनी निवासी रवि मिश्र बलरामपुर अस्पताल के ब्लड बैंक में पहुंचा। ड्यूटी पर मौजूद कर्मचारी से बिना डोनर ब्लड यूनिट देने के लिए कहा। कर्मचारी ने डॉक्टर द्वारा भरा गया रिक्यूजीशन फार्म मांगा तो रवि ने तत्काल फार्म दे दिया। एक ब्लड सैंपल भी दे दिया। इस फार्म पर मरीज को बिना डोनर ब्लड यूनिट देने के लिए लिखा गया था।
फार्म में वरिष्ठ डॉ. आरएन मिश्र के हस्ताक्षर बने हुए थे। कर्मचारी को डाक्टर के हस्ताक्षर पर कुछ शक हुआ। वही तुरंत डॉ. आरएन मिश्र को फोन मिला दिया आैर पूरी जानकारी दी। डॉ. मिश्र ने बताया कि उस फार्म व मरीज भर्ती की जानकारी से इनकार कर दिया है। यह सुनते ही कर्मचारी के होश फाख्ता हो गये। फार्म को गहनता से देखने पर पता चला कि डाक्टर का गलत मोबाइल नम्बर भी लिखा गया है।
कर्मचारी ने टेक्नीशियन को तत्काल ब्लड स्क्रींनिग समेत दूसरी प्रक्रिया रोक दी। तत्काल दलाल रवि को पकड़ लिया। अस्पताल के सीएमएस डॉ. जीपी गुप्ता को मामले की जानकारी देने के बाद रवि ने अपने मोबाइल नम्बर पर दर्ज डॉ. आरएन मिश्र से कर्मचारी की बात करा दी। बात करने वाला डाक्टर नहीं था, कर्मचारी जानते थे। कर्मचारी ने अपने मोबाइल में दर्ज डॉ. आरएन मिश्र के नम्बर से दलाल के नम्बर में मिलाना कराया। वह नम्बर भी गलत था। दलाल ने डॉ. आरएन मिश्र के नाम का फर्जी नम्बर दर्ज कर रखा था। बताया जाता है कि कर्मचारियों को अर्दब में लेने के लिए अपने मोबाइल से बात कराता था। दलाल को पकड़ने के बाद अस्पताल प्रशासन ने आंतरिक स्तर पर जांच कराने के निर्देश दे दिये है।












