सिविल अस्पताल : छुट्टी पर चल रहे विभागाध्यक्ष की मुहर से मरीजों को निजी सेंटर भेज रहे रेजीडेंट डॉक्टर

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ऑपरेशन के नाम पर मांगे 2000 रुपये

​लखनऊ। राजधानी के प्रतिष्ठित डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी (सिविल) अस्पताल से भ्रष्टाचार और गंभीर लापरवाही का मामला सामने आया है। ओपीडी में इलाज कराने पहुंचे एक 19 वर्षीय युवक से ऑपरेशन के नाम पर दो हजार रुपये की मांग की गई और जांच के लिए बाहर के प्राइवेट सेंटर भेज दिया गया। हैरान करने वाली बात यह रही कि इसके लिए छुट्टी पर चल रहे विभागाध्यक्ष (HoD) की सरकारी मुहर का गलत इस्तेमाल किया गया। पीड़ित मरीज ने इस पूरे मामले की शिकायत अस्पताल निदेशक से की है, जिसके बाद हड़कंप मच गया।

​निजी सेंटर भेजने और रिश्वत मांगने के मुख्य बिंदु:
​क्या है पूरा मामला: मडियांव निवासी 19 वर्षीय आर्यन सिंह पीठ में गांठ का इलाज कराने सिविल अस्पताल पहुंचे थे। ओपीडी में मौजूद रेजीडेंट डॉक्टर ने सरकारी रिपोर्ट सही न आने का झांसा देकर मरीज को बाहर के प्राइवेट सेंटर में जांच कराने की सलाह दी।
​ऑपरेशन के नाम पर वसूली: जांच के अलावा रेजीडेंट डॉक्टर ने मरीज से ऑपरेशन के एवज में करीब ₹2,000 के खर्च की बात कही।

​छुट्टी पर विभागाध्यक्ष, फिर भी लगी मुहर: शक होने पर मरीज ने जब निदेशक से शिकायत की, तो पड़ताल में खुलासा हुआ कि संबंधित विभागाध्यक्ष छुट्टी पर थे, फिर भी रेजीडेंट डॉक्टर सरकारी परचे पर उनकी मुहर का धड़ल्ले से फर्जी इस्तेमाल कर रहे थे।

​अस्पताल प्रशासन का एक्शन
​अस्पताल निदेशक डॉ. जीपी गुप्ता ने मामले को गंभीरता से लेते हुए तुरंत मरीज की सभी जांचें अस्पताल के भीतर ही कराने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने साफ किया कि मरीज से केवल नियमानुसार सरकारी फीस ही ली जाएगी।
​निदेशक ने पूरे प्रकरण की विभागीय जांच के आदेश दे दिए हैं। उन्होंने सख्त लहजे में कहा कि यदि जांच में आरोप सिद्ध होते हैं, तो दोषी रेजीडेंट डॉक्टर के खिलाफ कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।

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